एक महीने की इबादत, रोजों का तोहफा, मुसर्रतों का आगाज, मोहब्बत की खुशबू, मुस्कराहटों का मौसम और रौनक का जश्न है ईद। इतनी ढेर सारी खूबियां और अपनों की मोहब्बत सात समंदर पार से लोगों को वतन खींच लाई। शहर में कई लोग सऊदी अरब, दुबई और इराक से अपने वतन लौट आए। कुछ लोग वतन वापसी की तैयारी कर रहे हैं, जो ईद से एक या दो दिन पहले आ जाएंगे।
रमजान की इबादत और रोजों के बाद ईद उल फितर का त्योहार जलवा अफरोज होगा। ईद के दिन छोटे-बड़े, अपने पराए, दोस्त-दुश्मन गले मिलते हैं। चारों तरफ खुशियां और मोहब्बत की खुशबू महकती है। हर किसी की चाहत होती है कि वो अपने के बीच ईद मनाएं।
ईद के दिन जो दुनिया से रुख्सत हो चुके अपनों की याद में भी आंसू छलक आ जाते हैं। रोजगार और काम की तलाश में सात समंदर पार रह रहे लोगों को भी ईद ने अपनों और अपने वतन की याद दिला दी। ईद उन्हें सात संदर पार से खींच लाई। घेरतोगा के एहतेशाम उज्जमा खां करीब आठ महीने पहले ओमान गए थे। एहतेशाम ने बताया कि ईद नजदीक आई तो अपनों और अपने वतन की याद आई। वो कुछ दिन की छुट्टी लेकर अपने के साथ ईद मनाने वतन लौट आए हैं। उनका कहना है कि ईद बाद वो वापस चले जाएंगे। बजौड़ी के टोला के शावेज खां भी करीब 10 महीने पहले काम की तलाश में सऊदी अरब गए थे।
शावेज खां भी ईद मनाने अपने घर लौट आए। कुछ दिन रुकने के बाद वापस लौट जाएंगे। केलेवाला तालाब के फुरकान भी दो साल की वीजा सऊदी अरब गया था, लेकिन ईद पर अपनों की याद आई तो छुट्टी लेकर रामपुर लौट आए। उनका कहना है कि उन्हें अपनों से मिलाने ईद खींच लाई। कुछ दिन बाद वह वापस लौट जाएंगे। कई लोग अपने वतन लौटने की तैयारी कर रहे हैं।