बिलासपुर रोड पर स्थित भोट गांव के ढाई सौ मकानों पर ध्वस्तीकरण की तलवार लटक रही है। ये गांव काठगोदाम-रामपुर नेशनल हाईवे निर्माण की जद में आ रहे हैं। मकानों के साथ ही दो धार्मिक स्थल और स्कूल भी जमींदोज होंगे। हाईवे बनाने के लिए गजट हो चुका है। जद में आने वाले मकानों में चार सौ परिवारों के लगभग 2000 बाशिंदे रहते हैं। न कोई जनप्रतिनिधि, न ही शासन-प्रशासन इनकी गुहार सुनने को तैयार है। हर ओर से नाउम्मीद ग्रामीण अब आंदोलन के लिए सड़क पर उतरने को तैयार हैं।
रामपुर से काठगोदाम तक सिक्सलेन का नेशनल हाईवे बनाने के लिए जमीन अधिग्रहीत कर ली गई है। आपत्तियां भी मांग ली गईं। आपत्तियों के बाद गजट भी जारी हो गया। अब कब्जा हटाकर हाईवे का निर्माण शुरू किया जाना है। इसके लिए भोट के पास हाटमिक्स प्लांट लगाया जा चुका है।
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हाईवे के निर्माण में सबसे बड़ा संकट भोट के चार सौ परिवारों पर आ गया है। जब आपत्तियां मांगी गई थीं तो ग्रामीणों को नेशनल हाईवे अथारिटी के अफसरों ने गुमराह करके बता दिया कि मिनी बाईपास निकाला जाएगा। ग्रामीणों ने इसीलिए आपत्तियां नहीं दीं। अब हाईवे के निर्माण का मानचित्र जारी हुआ तो उसमें भोट गांव के ढाई सौ मकान, दो धर्मस्थल, दो स्कूल और 100 दुकानें हाईवे में ध्वस्त कर दिए जाएंगे। क्योंकि यह हाईवे की जद में आ रहे हैं।
हाईवे अथारिटी ने सीमेंट के पिलर लगाकर इनके बीच की जमीन पर कब्जा लेने का संकेतक भी बना दिया है तो ग्रामीणों में आक्रोश पनप गया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि एक भी मकान टूटा तो सड़कों पर उतर जाएंगे।