स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी मानो झोलाछाप के आगे नतमस्तक से हो गए हैं। शायद यही वजह है कि झोलाछाप के खिलाफ कार्रवाई को लेकर लगातार लोग प्रदर्शन कर रहे हैं, पुतले फूंक रहे हैं और ज्ञापन दे रहे हैं। लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है, लेकिन अब तक स्वास्थ्य अधिकारी हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों से शहर तक झोलाछाप लोगों की जिंदगियों से खिलवाड़ कर रहे हैं। लगातार इन झोलछाप के हाथों मरीजों की मौत हो रही हैं। हाल ही में शनिवार पांच दिसंबर की रात भोट थाना क्षेत्र के करीमपुर शर्की गांव निवासी जशोदा और उसके नवजात की मौत भी एक ऐसे ही नर्सिंग होम में प्रसव के बाद हो गई, जोकि अवैध रूप से चल रहा था।
इससे पहले अजीतपुर, अजीमनगर थाना क्षेत्र और शाहबाद में झोलाछाप ने ग्रामीणों की जिंदगी ली है, लेकिन ये सब स्वास्थ्य अधिकारियों को नजर नहीं आ रहा है। पुराना गंज में अवैध रूप से चल रहे नर्सिंग होम में जच्चा-बच्चा की मौत के बाद तो झोलाछाप के खिलाफ कार्रवाई को लेकर लगातार प्रदर्शन हुए हैं।
प्रशासन को ज्ञापन भी दिया गया है, लेकिन ये सब शायद स्वास्थ्य अधिकारियों की चेतना जाग्रत करने में नाकाफी साबित हो रहा है। अब लोगों के जहन में यही सवाल कौंध रहा है कि आखिर वो कौन सी वजह है, जिसने स्वास्थ्य अधिकारियों को झोलाछाप के आगे बौना साबित कर दिया है।
झोलाछापों के खिलाफ कार्रवाई का जिम्मा संभालने वाले नोडल अधिकारी डा. अनवर सादात कार्रवाई को लेकर कदम आगे नहीं बढ़ा पा रहे हैं। वहीं, इस संबंध में सीएमओ डॉ. शंकर लाल सारस्वत ने कहा कि जिले में जल्द ही अभियान चलाकर झोलाछाप के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।