रामपुर। पांच लाख रुपये दो नहीं तो घर अवैध घोषित कर बुलडोजर चलाकर ध्वस्त कर देंगे...तुमने हमको वोट भी नहीं दिया है। यह आरोप मसवासी के नगर पंचायत अध्यक्ष दिनेश गोयल पर लगा है। वार्ड नंबर-7 के बाबू अहमद का कहना है कि 10 दिसंबर को सुबह 10 बजे बुलडोजर के साथ अधिशासी अधिकारी (ईओ) समेत नगर पालिका की टीम उनके दरवाजे पर खड़ी थी। उन्होंने ईओ के बहुत हाथ-पैर जोड़े तब उन्हें जल्द घर खाली कर भाग जाने की हिदायत देकर पालिका की टीम बुलडोजर के साथ वापस लौटी थी।
इसकी शिकायत लेकर बाबू अहमद 12 दिसंबर को रामपुर कलक्ट्रेट पहुंचे थे, जहां उनकी डीएम से मुलाकात नहीं हो सकी तो उनके कार्यालय में शिकायत देकर लौट गए थे। राहत मिलने की उम्मीद में उन्होंने अपनी शिकायत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भी ट्वीट की है और मुख्यमंत्री को भी टैग किया है।
पूरा मामला सुर्खियों में है। लेकिन, बाबू अहमद की समस्या सुनने को 15 दिसंबर तक उनके पास कोई जिम्मेदार नहीं पहुंचा। शिकायत को डीएम तक पहुंचाने और सार्वजनिक करने के बाद बाबू अहमद विपक्षियों से काफी भयभीत हैं। उनका कहना है कि 10 दिसंबर की सुबह ईओ अपनी पूरी टीम के साथ बुलडोजर लेकर उनके घर के बाहर आ पहुंचे थे। मोहल्ले के लोगों के सामने उन्हें काफी बेइज्जत भी किया और उनके घर को अवैध निर्मित होना बताया। सार्वजनिक हो रही शिकायत में बाबू अहमद ने लिखा है कि ईओ ने उन्हें घर खाली करने की धमकी देकर कहा है कि जितनी जल्दी हो सके, घर खाली कर दो।
शिकायत में बाबू अहमद ने कहा है कि नगर पंचायत अध्यक्ष दिनेश गोयल ने उन्हें धमकाया है कि तुमने मुझे वोट नहीं दिया है अब देखूंगा तू कहां तक मुझसे बचेगा...तेरे घर में नगर पंचायत के सफाई कर्मचारी घुसेड़कर तुझ पर बच्चों सहित एससी-एसटी एक्ट का मुकदमा लगवा दूंगा। परेशान बाबू अहमद का कहना है कि कई बार नगर पंचायत अध्यक्ष दिनेश गोयल उन्हें बुलाकर भी धमका चुके हैं। वह उससे पांच लाख रुपये मांग रहे हैं। बाबू ने बताया कि उसका बड़ा परिवार है। पांच-छह बीघे खेती है। खर्च पूरा करने को वह कभी-कभी बाजार में सब्जी बेच लेता है और मजदूरी भी करता है।
वर्ष 1971 में पिता-ताऊ ने खरीदी थी जमीन
सार्वजनिक हुई शिकायत में बाबू अहमद ने लिखा है कि नगर पंचायत मसवासी के वार्ड-7 में स्थित गाटा संख्या-33 रकबा 0.1170 हेक्टेयर में वह 1/2 भाग का मालिक और काबिज है। यह जमीन उसके पिता मोहम्मद हुसैन पुत्र जमा और ताऊ शौकत अली के नाम वर्ष 1971 से राजस्व रिकॉर्ड खतौनी में दर्ज है। हालांकि ताऊ ने अपने हिस्से की जमीन बेच ली थी। लेकिन, मृतक पिता की विरासत वाली जमीन पर वह (बाबू अहमद) घर बना कर बच्चों, बहू और पत्नी के साथ रह रहा है।
बाबू अहमद कौन हैं, उसे हम नहीं जानते। लेकिन, जो वह झूठ बोल रहा है। गाटा-31 पर अवैध कब्जा कर मकान बनाए। उसकी तरह अन्य कई लोग कब्जा किए हैं। ये जमीन नगर पंचायत की है, उस पर कब्जे हटेंगे। ईओ से हमारी बनती भी नहीं है। वह बाबू अहमद के यहां जेसीबी लेकर गए होंगे..। पांच लाख रुपये व अन्य आरोप फर्जी-झूठे हैं। कुछ लोग हमारी छवि को खराब कर रहे हैं।
- दिनेश गोयल, अध्यक्ष, नगर पंचायत, मसवासी
गाटा-33 पर बाबू अहमद की जमीन है लेकिन, उसने सरकारी गाटा-31 में भी कब्जा कर रखा है। यही नहीं, इस सरकारी गाटे में कुछ हिस्सा जमीन दूसरे को बेच भी दी है। 10 दिसंबर को दोपहर दो बजे हम मौके पर अतिक्रमण हटाने गए थे तो बाबू ने वहां काफी हंगामा किया था। गाटा-31 की जमीन कब्जा करने के विरुद्ध हमने 2022 में बाबू को तीन नोटिस भी दिए थे। - मनोज कुमार मिश्र, अधिशासी अधिकारी, मसवासी