रोते-बिलखते परिजनों को ढांढस बंधाते लोगों का सब्र छूट जाए तो समझा जा सकता है कि शोक कितना गहरा होगा। 10 मौतों पर हर आंख रोई। घर के बरामदे में रखे शवों पर बिलखते परिजनों की चीत्कार और रुदन। अपनों के गम में बेसुध परिजन। घर के आंगन से लेकर गांवों की गलियों तक लगा लोगों का जमावड़ा। हर किसी आंखों में आंसू और लड़खड़ाती जुबां से बयां होता हादसे का दर्द।
गंगापुर कदीम में एक ही परिवार के दस लोगों की सड़क हादसे में मौत ने पूरे जिले को झकझोर दिया। विलाप करते परिजनों का अपनों को खोने का दर्द ढांढस बंधाने पहुंचे लोगों को भी रुला रहा था। शुक्रवार को गंगापुर कदीम में मित्रपाल और छत्रपाल के घर पर गमगीन लोगों की पूरे दिन भीड़ लगी रही। भीड़ का आलम यह था कि गांव के दर्जनों घरों से लेकर गलियों तक में सिर्फ गमगीन चेहरे ही नजर आ रहे थे।
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गंगापुर कदीम निवासी मित्रपाल व छत्रपाल बच्चों व परिजनों के साथ गुरुवार को विवाह समारोह से वापस लौट रहे थे। इसी दौरान मंसूरपुर बाईपास पर उनकी कार हादसे का शिकार हो गई। जिसमें मित्रपाल समेत दस कार सवार परिजनों की मौत हो गई तो तीन गंभीर हालत में मेरठ मेडिकल कालेज में भर्ती हैं।
हादसे के बाद शुक्रवार को जब शव गांव पहुंचे तो पूरा गांव उमड़ पड़ा। मित्रपाल और छत्रपाल के घर पर हजारों ग्रामीण ढांढस बंधाने पहुंचे लेकिन, आंगन में रखे शवों पर बिलखते परिजनों को देखकर सबके दिल बैठ गए। परिजनों को ढांढस बंधाने की कोशिश कर रहे ग्रामीण खुद भी रो पड़े। मित्रपाल-छत्रपाल के घर के आसपास गुरुवार रात से लेकर शुक्रवार शाम तक बस रुदन की आवाजें ही लोगों के दिलों को चीरती रहीं।