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Rampur News: अनिश्चितताओं में फंसा जौहर ट्रस्ट के संस्थानों का भविष्य

Thu, 25 Jun 2026 01:21 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रामपुर
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रामपुर। कभी शिक्षा और सामाजिक विकास के मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया गया जौहर ट्रस्ट अब कानूनी और प्रशासनिक चुनौतियों से घिरा हुआ है। ट्रस्ट से संचालित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी और रामपुर पब्लिक स्कूल को लेकर विभिन्न मामलों में जांच और कार्रवाई के चलते अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है।
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जौहर ट्रस्ट की स्थापना वर्ष 2004 में शिक्षा और सामाजिक उत्थान का उद्देश्य बताकर की गई थी। वर्ष 2006 में ट्रस्ट के अध्यक्ष आजम खां ने मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी की नींव रखी। करीब 300 एकड़ क्षेत्र में विकसित यूनिवर्सिटी परिसर समय के साथ चर्चा का केंद्र रहा। ट्रस्ट पर शिक्षा विभाग की जमीन और भवन के उपयोग को लेकर आरोप लगे। यतीमखाना बस्ती हटाकर स्कूल स्थापित करने का मामला भी सुर्खियों में रहा। सपा शासनकाल में ट्रस्ट का विस्तार तेजी से हुआ और इसकी परिसंपत्तियों का मूल्य अरबों रुपये तक पहुंच गया।
वर्ष 2017 से ट्रस्ट की गतिविधियां जांच के दायरे में आ गईं। जमीन कब्जाने, अवैध आवंटन और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े आरोपों के बाद प्रशासन ने ट्रस्ट को आवंटित विभिन्न संपत्तियों की समीक्षा शुरू की। विवादित जमीनों और भवनों का पुनर्मूल्यांकन किया गया तथा कई मामलों में कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ी और अब जौहर ट्रस्ट का रजिस्ट्रेशन ही रद्द हो गया।
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विधायक की शिकायत के बाद तेज हुई जांच
जौहर ट्रस्ट से जुड़े मामलों ने उस समय अधिक तूल पकड़ा जब भाजपा विधायक आकाश सक्सेना ने ट्रस्ट की संपत्तियों, सरकारी जमीनों के उपयोग और कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के बाद प्रशासनिक और जांच एजेंसियां सक्रिय हुईं तथा विभिन्न मामलों में जांच शुरू की गई। जांच के दौरान सरकारी जमीनों के आवंटन, भवनों के उपयोग और वित्तीय प्रक्रियाओं से जुड़े बिंदुओं की पड़ताल की गई। इसके बाद कई मामलों में कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ी।
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केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई भी रही चर्चा में
आजम खां से जुड़े परिसर पहले भी केंद्रीय एजेंसियों की जांच के दायरे में रहे हैं। सितंबर 2023 में आयकर विभाग ने रामपुर सहित प्रदेश के कई शहरों में एक साथ मारे थे। जांच के दौरान वित्तीय दस्तावेजों, संपत्तियों और लेनदेन से जुड़े अभिलेखों की पड़ताल की गई थी। बाद में उनके करीबी कारोबारियों, ठेकेदारों और सहयोगियों के ठिकानों पर भी जांच की कार्रवाई हुई थी।
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ट्रस्ट की कार्यप्रणाली को लेकर उठते रहे हैं प्रश्न
मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट की भूमिका और कार्यप्रणाली को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। आरोप लगाए जाते रहे हैं कि ट्रस्ट के प्रबंधन में आजम खां के परिजन और करीबी लोग शामिल हैं। विरोधियों ने ट्रस्ट के माध्यम से शैक्षणिक संस्थानों के विस्तार और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पर आपत्ति जताई थी। जौहर यूनिवर्सिटी समेत ट्रस्ट की विभिन्न संपत्तियां लंबे समय से चर्चा का विषय रही हैं। हालांकि संबंधित पक्ष आरोपों को निराधार बताते रहे हैं और विभिन्न मामलों में जांच एवं न्यायिक प्रक्रियाएं चलती रहीं।
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