रामपुर। जनपद में वन्य जीव संरक्षण व्यवस्था लगातार कटघरे में है। बीते चार वर्षों में अलग-अलग स्थानों पर सड़क हादसों में पांच तेंदुओं की मौत हो चुकी है। इसके बावजूद सुरक्षा के ठोस इंतजाम नहीं किए गए। अधिकतर मामलों में तेंदुओं की सड़क पार करते समय तेज रफ्तार वाहनों की चपेट में आने से मौत हुई है।
ग्रामीणों का कहना है कि तेंदुओं की मौजूदगी की सूचना पहले से वन विभाग को दी जाती रही, लेकिन न तो पिंजरे लगाए गए और न ही हाईवे पर चेतावनी बोर्ड या स्पीड कंट्रोल जैसे उपाय किए गए। कभी-कभार पिंजरे लगाए जाते हैं तो उसको नाममात्र के लिए लगाकर छोड़ दिया जाता है।
पीपल फॉर एनिमल्स के सदस्य महेश भारद्वाज ने कहा कि वन्यजीवों के सुरक्षित आवागमन के लिए अंडरपास, साइन बोर्ड और निगरानी बढ़ाना जरूरी है। वन विभाग हर घटना के बाद जांच की बात करता है, लेकिन जमीनी स्तर पर सुधार नजर नहीं आता। लगातार हो रहीं घटनाएं सिस्टम की लापरवाही को उजागर कर रही हैं, जिससे दुर्लभ वन्यजीवों की जान जा रही है। (संवाद)
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केस 01
अप्रैल 2023 में मसवासी क्षेत्र के काशीपुर-बाजपुर मार्ग पर एक तेंदुआ सड़क पार करते समय अज्ञात वाहन की टक्कर से मारा गया। ग्रामीणों की पूर्व सूचना के बावजूद विभाग सक्रिय नहीं हुआ जिससे उसकी सड़क हादसे में मौत हो गई।
केस 02
जून 2024 में स्वार क्षेत्र के पानीपत-खटीमा मार्ग पर ज्वालापुर गांव के पास तेंदुए की मौत हुई। सड़क पार करते समय तेज रफ्तार वाहन ने उसे कुचल दिया। ग्रामीणों ने तेंदुआ होने की सूचना बार-बार वन विभाग को दी थी।
केस 03
जून 2024 में ही स्वार क्षेत्र के जगन्नाथपुर के पास एक और तेंदुआ अज्ञात वाहन की चपेट में आ गया। यह तेंदुआ करीब एक सप्ताह से क्षेत्र में घूम रहा था और ग्रामीणों में भय का कारण बना हुआ था, लेकिन समय रहते उसे पकड़ने के प्रयास नाकाफी रहे।
केस 04
अप्रैल 2026 में दढ़ियाल क्षेत्र के कोसी पुल के पास टांडा-बाजपुर मार्ग पर तेंदुआ सड़क हादसे का शिकार हो गया। सुबह तड़के हुए इस हादसे में अज्ञात वाहन की टक्कर से उसकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद फिर वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे।
केस 05
मई 2025 को भी बाजपुर मार्ग पर सड़क किनारे एक तेंदुए के शावक का शव मिला था। उस समय भी मौत के कारणों को लेकर असमंजस की स्थिति बनी रही थी। इसे दुर्घटना या हत्या कर शव फेंकने से जोड़कर देखा जा रहा था।
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जहां से भी क्षेत्र में तेंदुए के आने की सूचना मिलती है, वहां पर तुरंत टीम को भेजकर विभाग की ओर से पर्याप्त इंतजाम किए जाते हैं। तेंदुओं की सुरक्षा को लेकर विभाग की ओर हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। -रमाकांत सक्सेना, वन रेंजर