कड़ाके की ठंड ने मत्स्य पालन पर ग्रहण लगा दिया। तालाबों में आक्सीजन की कमी हो गई। लिहाजा, मछलियां दम घुटने से मर रही हैं। यही हालात रहे तो मत्स्य पालकों को लाखों का नुकसान पहुंच सकता है। मत्स्य विभाग के अधिकारियों की चिंता बढ़ गई है। वह मत्स्य पालकों को इससे बचाव के उपाय बता रहे हैं।
जिले में मछली का कारोबार बड़े पैमाने पर किया जा रहा है। ग्राम समाज के 375.519 हेक्टेयर क्षेत्रफल के 449 तालाबों में रोहू, कतला, नैन, सिल्वर कार्प, ग्रास कार्प और कामन कार्प का पालन हो रहा है। इसी तरह मिलक, शाहबाद, स्वार और सदर क्षेत्र में 30 हैचरियां हैं। हैचरियों में करीब 300 करोड़ का मछली का बीज तैयार होता है। सबसे ज्यादा हैचरियां मिलक क्षेत्र में हैं।
यूपी के कई जिलों समेत सात प्रदेशों में बीच की सप्लाई हो रही है। कड़ाके की ठंड से तालाबों में पर्याप्त आक्सीजन नहीं बन रहा है। लिहाजा,दम घुटने से मछलियां मर रही हैं। मत्स्य पालकों को लाखों रुपये का नुकसान पहुंच गया है। मत्स्य पालन विभाग के अधिकारियों की भी चिंता बड़ गई है। अधिकारी मत्स्य पालकों को बचाव के उपाय बता रहे हैं।