सावन माह के पहले सोमवार पर शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। मंदिरों में सुबह से ही शिव भक्तों की कतार लग गई। श्रद्धालुओं ने विधिवत पूजन कर शिवलिंग पर जलाभिषेक कर शिवजी की आराधना की।
देवों के देव महादेव के भक्तों के लिए पूरा सावन माह पर्व से कम नहीं है। देवशयनी एकादशी के बाद भगवान विष्णु के शयन के लिए चले जाने के कारण भगवान शिव पर ही सृष्टि के पालन की भी जिम्मेदारी होती है। जिससे महादेव संहारक की जगह सृष्टि के पालनहार की तरह भक्तों का उद्धार करते हैं।
सावन माह में शिव पूजा और शिवलिंग पर जलाभिषेक का विशेष महत्व है। इसी कारण सावन माह के पहले सोमवार को सुबह से ही मंदिरों में भीड़ जुटनी शुरू हो गई। ऐतिहासिक भमरौआ शिव मंदिर, पंजाबनगर शिव मंदिर और मिलक के रठौंडा शिव मंदिर के साथ ही नगर में सिविल लाइंस स्थित प्राचीन दुर्गा शिव मंदिर, नर्मदेश्वर महादेव शिव मंदिर, धमोरा स्थित जोड़ेश्वर महादेव शिव मंदिर समेत सभी मंदिरों में श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक कर शिवजी का पूजन किया।
श्रद्धालुओं ने गंगाजल, दूध से अभिषेक कर पुष्प, बेलपत्र, मिष्ठान और फल-फूल अर्पित किए। घंटे-घड़ियाल की ध्वनि के बीच शंखनाद के साथ शिव आरती और ओम् नम: शिवाय के साथ महामृत्युंजय मंत्र का जप किया। पहले सोमवार के कारण कांवड़ियों की संख्या कम रही लेकिन, दूसरे सोमवार से हजारों कांवड़ियों के साथ शिवभक्त मंदिरों में जुटेंगे।