रामपुर। जिला बेसिक शिक्षाधिकारी कार्यालय के वित्त एवं लेखाधिकारी अक्सर उच्चाधिकारियों को बिना बताए ही गायब हो जाते हैं। शिक्षकों की पेंशन एवं वेतन संबंधी फाइलें भी लंबित हैं। आलम यह है कि दो साल पहले सेवानिवृत्त बाबू ने अब तक फाइलें जमा नहीं की हैं। इसमें न तो सेवानिवृत्त बाबू के खिलाफ कोई कार्रवाई की गई है और न ही फाइलें जमा कराने के लिए प्रयास किए हैं। ऐसे में डीएम ने वित्त एवं लेखाधिकारी से चार्ज हटा दिया है। उनका चार्ज स्वास्थ्य विभाग के लेखाधिकारी को दिया है।
जिलाधिकारी आन्जनेय कुुमार सिंह ने शिक्षा विभाग के अफसरों के साथ बैठक की। इस दौरान पता लगा कि वित्त एवं लेखाधिकारी कार्यालय का एक क्लर्क 2018 में सेवानिवृत्त हो गए थे, लेकिन उन्होंने अब तक कई शिक्षकों की सेवा पुस्तिकाएं कार्यालय में जमा नहीं की हैं। इसके अलावा भी कई जरूरी फाइलें उनके पास हैं, लेकिन वित्त एवं लेखाधिकारी ने उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। यही नहीं शिक्षकों की पेंशन एवं वेतन संबंधी भी तमाम मामले लंबित हैं। बीएसए कार्यालय के वित्त एवं लेखाधिकारी पर आरोप है कि वह अक्सर उच्चाधिकारियों को बिना बताए ही मुख्यालय से गायब हो जाते हैं, जिस पर जिलाधिकारी ने उनका चार्ज हटा दिया है। अब यह काम स्वास्थ्य विभाग के लेखाधिकारी को दिया गया है। साथ ही समस्त लंबित कार्य दो दिनों के भीतर पूरे करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने बताया कि जिले के प्राथमिक विद्यालयों में शौचालयों की दशा बदत्तर है। कहने को तो लगभग 90-95 फीसदी स्कूलों में शौचाचल हैं, लेकिन वहां रनिग वाटर की व्यस्था नहीं है। उन्होंने कायाकल्प योजना के नोडल अधिकारियों को निर्देशित किया है कि दीक्षा एप पर समस्त कार्यों को अपडेट किया जाए। बोले कि इन दिनों शिक्षकों की निष्ठा ट्रेनिंग चल रही है, जिसके बाद शिक्षकों की स्क्रीनिंग कराई जाएगी। स्पोर्ट्स मद में भी सरकार ने धन जारी कर दिया है, जिसमें सप्लायरों से खेल सामग्रियों को लेकर जानकारी ली जाएगी, जिसके अनुसार स्कूलों को सामग्री की आपूर्ति होगी।