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करोड़ों की चोट से कराह रहे किसान

Sat, 09 Apr 2016 11:05 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रामपुर
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क‌िसान - फोटो : अमर उजाला
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सरकारी सिस्टम और बीमा कंपनी किसानों को हर साल करोड़ों रुपये की चोट दे रही हैं। कभी बाढ़ तो कभी सूखा पड़ने से बर्बाद हो रहे किसानों को नुकसान का क्लेम नहीं मिल रहा है। पांच साल में किसानों को करोड़ों की चपत लग चुकी है। जिला सहकारी बैंक भी किसानों की इस समस्या पर गंभीर है। वो अगले साल बीमा का प्रीमियम वसूलने पर रोक लगा सकती है। 
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  राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना के तहत किसानों से हर फसल के लिए प्रीमियम वसूला जा रहा है। किसान कभी बाढ़ तो कभी सूखे से बर्बाद हो रहे हैं। फसलों में भारी नुकसान होने के बाद भी किसानों को बीमा का क्लेम नहीं मिलता। पांच साल के आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो अकेले जिला सहकारी बैंक में पंजीकृत किसानों को करोड़ों की चपत लग चुकी है।   खरीफ 2011-12 में डीसीबी ने किसानों से प्रीमियम के रूप में 1.75 करोड़ रुपये वसूल कर 76.36 करोड़ का बीमा किया था। उस वक्त भी बाढ़ आई थी और फसलों को काफी नुकसान पहुंचा था। किसानों को क्लेम के सिर्फ 27.03 लाख रुपये मिले। कृषि विभाग और बैंक के अधिकारियों के आंकलन के मुताबिक क्लेम के रूप में 40 करोड़ रुपये मिलने चाहिए थे।
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  इसी तरह अन्य वर्षों में भी किसानों को नुकसान का बहुत क्लेम मिला। डीसीबी अब बीमा का प्रीमियम वसूलने पर रोक लगाने का विचार कर रही है। बोर्ड की बैठक में ये प्रस्ताव पास हो सकता है। सचिव डीसीबी मोहम्मद अंजुम खां ने कहा क‌ि जिला सहकारी बैंक के सबसे ज्यादा सदस्य हैं। किसान कई साल से दैवी आपदा से जूझ रहे हैं। क्राप कटिंग के आंकड़े वास्तविक नहीं होते।   इसलिए किसानों को नुकसान का क्लेम नहीं मिल रहा है। बीते पांच साल में किसानों को 250 करोड़ की चपत लगी है। 2014-15 में तो बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से 80 फीसदी गेहूं की फसल बर्बाद हो गई थी। आंकलन के मुताबिक किसानों को क्लेम के रूप में 75 करोड़ मिलने चाहिए थे। चेयरमैन डीसीबी सलीम कासिम ने कहा क‌ि किसान रबी की फसल की ओर देख रहे हैं।   अगर किसानों को इस बार भी पूरा क्लेम नहीं मिला तो किसानों से बीमा के नाम पर प्रीमियम वसूलने पर रोक लगा दी जाएगी। क्योंकि क्राप कटिंग के फर्जी आंकड़े भेजे जाते हैं। किसानों को बीमा कंपनी कई साल से पूरा क्लेम नहीं दे रही है।
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