रामपुर। कृषि विज्ञान केंद्र धमोरा में मंगलवार को जिले की सहकारी समितियों के उर्वरक बिक्री प्रभारियों को प्रशिक्षण दिया गया। इसमें कृषि वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने स्पष्ट रूप से कहा कि अत्यधिक यूरिया का उपयोग खेतों की मिट्टी की उर्वरा शक्ति के लिए खतरनाक है। अभी भले ही अच्छी पैदावार मिल रही हो लेकिन भविष्य के लिए यह बेहद खतरनाक है। पैदावार घटने लगेगी। इसलिए अभी संभलने की आवश्यकता है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में सहकारिता विभाग के सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक शिवम मलिक, जिला सहकारी बैंक महाप्रबंधक प्रकाश त्रिपाठी, इफको मुरादाबाद मंडल प्रबंधक जितेंद्र गंगवार, कृषि विज्ञान केंद्र धमोरा के मुख्य वैज्ञानिक डॉ. मयंक राय, वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. नरेंद्र गंगवार , डॉ. अनुज बंसल, यूपीसीबी मुरादाबाद क्षेत्रीय प्रबंधक मनोज एवं इफको आम सभा प्रतिनिधि हिमांशु गंगवार ने संबोधित किया गया।
इफको उप क्षेत्र प्रबंधक जयकृत सिंह रावत के संचालन में आयोजित प्रशिक्षण में वैज्ञानिकों व विशेषज्ञों ने अत्यधिक यूरिया की मात्रा उपयोग करने पर इसके हानिकारक प्रभाव के बारे में चर्चा की।
कृषि वैज्ञानिक डॉ नरेंद्र गंगवार ने नत्रजन, स्फुर एवं पोटाश उर्वरकों के संतुलित उपयोग अनुपात 4:2:1 के स्थान पर जिले में उर्वरकों का उपयोग इससे कहीं अधिक अनुपात में होने पर चिंता जताई।
उन्होंने किसानों को फसल के ऊपर से दी जाने वाली फास्फेटिक उर्वरकों का उपयोग न करने की सलाह देते हुए जलविलय उर्वरक के ग्रेड जैसे 12:61, 13:0:45, 0:52:43 का पर्णीय छिड़काव (सीधे पत्तियों पर छिड़काव) किया जाए।
उन्होंने उर्वरक बिक्री प्रभारियों को किसानों द्वारा इफको जैव उर्वरक एनपीके लिक्विड कंसोर्टिया के उपयोग विधि सिखाई। इफको मुरादाबाद मंडल प्रबंधक जितेंद्र गंगवार ने इफको नैनो उर्वरकों, रबी सीजन के लिए नैनो डीएपी से बीज उपचार कराने की सलाह दी। मुख्य वैज्ञानिक डॉ मयंक राय ने बिक्री प्रभारियों को प्रयोगशाला से कृषि तकनीकी को किसानों तक पहुंचाने के विषय पर चर्चा की।
समापन पर विशाल गौड़, निशांत सांगवान व रोहित कुमार ने अतिथि अधिकारियों एवं प्रतिभागियों का धन्यवाद किया गया। इसमें 80 समिति उर्वरक बिक्री प्रभारियों ने भाग लिया।