ईडी इन कंपनियों के आय-व्यय का ब्योरा खंगाल रही है। कंपनियों के बैंक खाते के साथ-साथ इनके आयकर के रिटर्न, जीएसटी का रिटर्न और श्रम विभाग में पंजीकरण की जांच की जा रही है। इस बात की जांच की जा रही है कि इन कंपनियों को ठेका किस आधार पर दिया गया। इन कंपनियों को जो ठेका दिया गया उसके लिए टेंडर निकाले गए थे, अगर टेंडर निकाले गए थे तो निर्धारित शर्तों का पालन किया गया या नहीं। ठेका मिलने के बाद इनको कब-कब कितना भुगतान किया गया। कंपनियों की ओर से आयकर और जीएसटी के मद में दाखिल किए गए रिटर्न की भी जांच की जा रही है। पुलिस इन कंपनियों के संचालकों पर नजर बनाए हुए हैं।
पुलिस की माने तो इन पांच कंपनियों के संचालकों में से एक कंपनी के संचालक का निधन हो चुका है। दो कंपनियों के संचालक फिलहाल जेल में हैं। एक कंपनी के संचालक कुछ साल पहले सत्ताधारी पार्टी के एक नेता की शरण में चला गया। अब उसने सत्ताधारी पार्टी के नेता से भी किनारा कर लिया है। फिलहाल वह रामपुर से बाहर रह रहा है। पांचवीं कंपनी के संचालक के बारे में पुलिस को यह जानकारी है कि वह कई बार दल बदल चुका है। कभी कांग्रेस के एक बड़े नेता का करीबी माना जाता था तो बाद में उसने सपा ने अपनी नजदीकियां बढ़ा लीं।
फिलहाल वह रामपुर से बाहर बताया जा रहा है। उसके बारे में चर्चा है कि वह अमेरिका चला गया है। पुलिस इस तथ्य की अधिकृत पुष्टि करने में लगी है। जानकारों की माने तो इन कंपनियों का सिजरा ईडी खंगाल रही है। ईडी अभी कुछ दिन पहले रामपुर आई तो उसने कई लोगों से पूछताछ की थी। पूछताछ में ईडी के हाथ कुछ अहम जानकारी लगी है। इस आधार पर जांच तेज कर दी गई है।