इलाज न मिलने से छात्रा की मौत
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मिलक कोतवाली क्षेत्र के लाड़पुर गांव निवासी हसनैन मियां की बुखार से पीड़ित बेटी परवीन (15) की मौत इलाज न मिल पाने की वजह से हो गई। परिजनों का आरोप है कि उनके पास पांच सौ के नोट थे लेकिन डाक्टर ने खुले रुपये न होने पर ढाई घंटे हाथ नहीं लगाया। बाद में दूसरे अस्पताल में भी खुले पैसे न होने की वजह से डेढ़ घंटे बैठाया। जब खुले रुपये लाकर दिए तब उपचार शुरू किया गया लेकिन परवीन की मौत हो गई।
लाड़पुर की परवीन की बुखार से हालत बिगड़ने पर पिता हसनैन और परिजन उसे रामपुर जिला अस्पताल ले गए। वहां के डाक्टरों ने सलाह दूसरी जगह ले जाने की सलाह दी। हसनैन के अनुसार इसके बाद वे परवीन को रामपुर के डा. ताज मोहम्मद को दिखाने के लिए गए। पर्चा बनाने के लिए काउंटर पर 390 रुपये मांगे गए। खुले पैसे नहीं होने पर रिश्तेदार के यहां पहुंचे और वहां से खुले रुपये लेकर पर्चा काउंटर पर दिए। जिसको लेकर करीब दो ढाई घंटे से ज्यादा समय गुजर चुका था।
इस बीच बेटी चीखती-चिल्लाती रही। पर्चा बनाने के बाद तब डा. ताज मोहम्मद ने परवीन को देखा और उन्होंने नोवा अस्पताल भेज दिया। जहां पर परवीन को भर्ती करने के अस्पताल में 25 रुपये जमा कराने को कहा, लेकिन खुले पैसे न होने से करीब डेढ घंटे तक बैठाए रखा। बाद में पांच सौ के ही नोट लेकर भर्ती कर लिया। इससे इलाज में देरी हो गई।
परवीन के पिता हसनैन का कहना है कि यदि उनकी बेटी को यदि दो घंटे पहले देखकर भर्ती कर लिया जाता। तब शायद उनकी बेटी सही हो सकती थी। उधर, इलाज करने वाले डाक्टरों डा ताज मुहम्मद और डा शारिक का कहना है कि लड़की की हालत सीरियस थी। पैसे की वजह से इलाज में देरी का आरोप गलत है।