जिला अस्पताल में आ रहे मरीजों को लिखी जा रही बाहर की दवा, जिम्मेदार मौन
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर। यूपी सरकार में उप मुख्यमंत्री व स्वास्थ्य मंत्री बृजेश पाठक के आदेश जिला अस्पताल के चिकित्सक नहीं मानते। यहां डंके की चोट पर चिकित्सक बाहर की दवा लिख रहे हैं। अस्पताल के बाहर खुले मेडिकल स्टोरों पर सुबह से लेकर रात तक दवा लेने के लिए मरीजों की भीड़ लगी रहती है।
सरकारी अस्पताल में कई बार चिकित्सकों की ओर से बाहर की दवा लिखने के मामले सामने आ चुके हैं। शासन इस पर सख्त भी है। डिप्टी सीएम बाहर की दवा लिखने वाले चिकित्सकों पर कार्रवाई करने चेतावनी दे चुके हैं। लेकिन जिला अस्पताल में तैनात चिकित्सकों को न तो डिप्टी सीएम का खौफ है और न ही सरकार का।
यहां सरकार के आदेश नहीं बल्कि उनका राज चलता है, तभी वह खुलेआम बाहर की दवा लिख रहे हैं। शुक्रवार को पड़ताल के दौरान पता चला कि हर पांचवें पर्चे के साथ बाहर की दवा लिखी जा रही है। मरीजों ने बताया कि चिकित्सक ने उनसे कहा था कि यह दवा वह बाहर से ले लें, ये ज्यादा असरदार होती हैं।
मरीज भी डॉक्टर की बातों में आकर निजी मेडिकल स्टोर पर दवाएं ले रहे हैं। अस्पताल में बाहर से दवा व इंजेक्शन लिखने की शिकायत पर जब शुक्रवार को पड़ताल की गई तो ओपीडी सहित इमरजेंसी में मरीजों के हाथों में पर्चियां दिखीं। इस पर डॉक्टरों ने बाहर की दवाएं लिखी थीं।
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केस 01
मैं जिला अस्पताल में दर्द की दवा लेने गया था। जहां पर चिकित्सक ने कुछ दवा तो अंदर की लिख दी और कुछ दवा एक छोटी पर पर्ची पर लिखकर देते हुए कहा कि यह दवा बाहर मिलेगी। -धर्मवीर, मिलक
केस 02
मेरी कई दिन से तबीयत खराब चल रही थी। मेरे पास निजी अस्पताल में इलाज कराने के लिए उतने पैसे नहीं थे, इसीलिए मैं अस्पताल में दवा लेने के लिए आया था। जहां पर चिकित्सक ने बाहर की दवा लिख दी। -नूर मोहम्मद, तीतर वाली पाखड़
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केस 03
मैं अपनी आंखाें की के लेकर जिला अस्पताल में इलाज कराने गई थी। चिकित्सक ने कुछ दवा अंदर से लिखकर दी और कुछ दवा अलग से लिखकर कहा कि ये बाहर से ले लेना। -उमरा
केस 04
सुबह आठ बजे पापा को सीने में दर्द होने पर जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराया गया था। जहां पर चिकित्सक ने बाहर से 350 रुपये का इंजेक्शन लिखकर दिया। जो मजबूरी में लाना पड़ा। -इमरान
सभी चिकित्सकों को बाहर की दवाएं न लिखने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। अगर फिर भी कोई गड़बड़ी कर रहा है तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी। कई बार चिकित्सकों को निर्देश जारी किए जा चुके हैं। इसके बाद भी सुधार न होने पर कार्रवाई के लिए वे स्वयं जिम्मेदार होंगे। -डॉ. आशु अग्रवाल, एडी हेल्थ, मुरादाबाद