आशा कार्यकर्ता वेलफेयर एसोसिएशन की बैठक में आशाओं से एकजुट होने की अपील की गई। बैठक में सरकार द्वारा आशाओं को सरकारी कर्मचारी घोषित करने के साथ ही नियत मानदेय दिए जाने की मांग उठाई गई। मांगों के निस्तारण को लेकर आशाओं ने कैबिनेट मंत्री मोहम्मद आजम खां से भी मुलाकात की।
अंबेडकर पार्क में हुई बैठक में आशाओं ने मुद्दा उठाया कि जब सरकार उनसे काम ले सकती है तो सही मानदेय क्यों नहीं दे सकती। आशा आज भी मामूली सी प्रोत्साहन राशि के सहारे हैं। इस प्रोत्साहन राशि से परिवार की गुजर-बसर करनी मुश्किल हो रही है। कहा कि कैसे भी मौसम या हालात में आशा को गर्भवती महिला को अस्पताल लेकर जाना पड़ता है। इसके लिए उन्हें मामूली सी प्रोत्साहन राशि दी जाती है।
संगठन लंबे समय से आशाओं को नियत मानेदय दस हजार रुपये प्रतिमाह दिए जाने और सरकारी कर्मचारी घोषित करने की मांग कर रहा है। लेकिन, इस ओर सरकार ने कोई ध्यान नहीं दिया है। इसके बाद तमाम आशाएं कैबिनेट मंत्री मोहम्मद आजम खां के कार्यालय पर पहुंच गईं। यहां पर आशाओं ने अपनी समस्याएं उन्हें बताईं और निस्तारण की मांग की। कैबिनेट मंत्री ने आशाओं की नियुक्ति केंद्र सरकार द्वारा किए जाने की बात कही और इस संबंध में सांसद से मिलकर निस्तारण कराने को कहा गया। जिससे आशाओं में निराशा है। ज्योति, मिथलेश, हूरवती, कमलेश, नूरानी, रेशमा, प्रवेश, शाइस्ता, मोनिका, जसवंती, नेहा आदि शामिल रहीं।