अहंकार को अंतत: परास्त होना पड़ता है। शक्ति, धन, ऐश्वर्य यहां तक कि तपस्या और ज्ञान का गर्व भी चूर-चूर हो जाता है। अधर्म पर धर्म की जीत की प्रतीक विजयदशमी पूरे जनपद में हर्षोल्लास के साथ मनाई गई।
स्थान-स्थान पर बुराई के प्रतीक रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतले फूंके गए। इस दौरान श्रीराम के जयघोष से पूरा इलाका गूंज उठा। बड़ी संख्या में बच्चों, महिलाओं समेत लोगों ने रामलीला के मंचन का लुत्फ उठाया। मेले लगे।
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बच्चों ने खिलौने, मिठाइयों की जमकर खरीदारी की। बड़ों का उत्साह भी देखते बनता था। उन्होंने घर की जरूरतों का सामान भी खरीदा।