सरकारी तंत्र अक्सर हादसे से भी सबक नहीं लेता। शायद यही वजह है कि राज्यरानी एक्सप्रेस के बेपटरी होने की घटना के बाद भी घटनास्थल के निकट रेलवे ट्रैक के ऊपर बना पुल हादसे के लिहाज से डेंजर जोन बना हुआ है। ट्रैक के ऊपर बने सड़क के इस छोटे से हिस्से के दुर्घटना के लिहाज से अतिसंवेदनशील होने के बावजूद इसकी मरम्मत व इसे दुरस्त रखने के लिए
सरकारी मशीनरी गंभीर नहीं दिखती। जिसके कारण सड़क पर करीब आधा मीटर लंबा एक गड्ढा हो गया है। वहीं एक ओर रेलिंग भी ध्वस्त है। जिससे कभी भी कोई वाहन नीचे गिर सकता है। क्षतिग्रस्त रेलिंग का कुछ मलबा किनारे पर लटक रहा है। यह मलबा भी कभी भी नीचे गिरकर किसी हादसे का सबब बन सकता है।
सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ प्रदेश की सभी सड़कों को गड्ढामुक्त करने की घोषणा कर रहे हैं। लेकिन, एनएचआई व प्रशासन के अफसर मुख्यमंत्री की इस मंशा को अमलीजामा पहनाने के लिए कोई खास गंभीर नजर नहीं आ रहे है। ऐसा इसलिए कि कोसी पुल के लिए शनिवार को राज्यरानी एक्सप्रेस के बेपटरी होने की बड़ी घटना के बाद भी घटनास्थल के निकट ही मंडरा रहे एक और खतरा किसी को नजर नहीं आ रहा है। जिस स्थान पर राज्यरानी एक्सप्रेस डिरेल हुई थी। वहीं पर ट्रैक के ऊपर से सड़क यातायात के लिए एक पुल बना हुआ है।
यह पुल बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुका है लेकिन, प्रशासन और एनएचएआई के अफसरों को न तो इस पुल की सड़क पर पड़े गड्ढे नजर आ रहे हैं और न ही एक साइड की क्षतिग्रस्त रेलिंग नजर आ रही है। पुल की सड़क में एक ओर तो काफी गहरा और लंबा गड्ढा हो गया जबकि दूसरे कोने पर भी सड़क टूट रही है।
इसी क्षतिग्रस्त सड़क से होकर रोजाना हजारों वाहन गुजर रहे हैं। ऐसे में उनमें सवार लोगों की जिंदगी पर कभी भी किसी बड़े हादसे का ग्रहण लग सकता है। इस पुल पर सड़क ही क्षतिग्रस्त नहीं है बल्कि एक साइड की रेलिंग का भी एक बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त हो चुका है। रेलिंग के क्षतिग्रस्त हिस्से के निकट ही मार्ग में मोड़ भी है। ऐसे में दोनों ओर से वाहन आने पर यदि कोई वाहन अनियंत्रित होता है तो वह जरा सा भी फिसलने पर सीधे रेलवे ट्रैक पर आकर ही गिरेगा।