रामपुर। मानसून से पहले नालों-नालियों की तली झाड़ सफाई और इन्हें कवर किए जाने का दावा हवाहवाई साबित हुआ। शहर में अधिकतर नाले इस समय गंदे पड़े हैं और खुले हैं। बारिश होने पर ये नाले लबालब हो जाते हैं और फिर कहर बनकर आमजन पर टूटते हैं। कई नाले ऐसे हैं, जो मोहल्लों के करीब से होकर गुजर रहे हैं। हादसों के बाद से यहां लोग डर के साए में जिंदगी जीने को मजबूर हैं।
शहर में मौजूदा समय में 84 नाले-नालियां हैं, जो जगह-जगह से होकर गुजर रहे हैं। हर साल नाला सफाई के लिए लाखों खर्च किए जाते हैं। इस बार भी 20 लाख के बोर्ड फंड से नाला सफाई कराई गई। करीब 100 से अधिक कर्मी भी लगाए गए। जेसीबी चली और तेल भी खर्च हुआ, लेकिन नतीजा सिफर रहा। मानसून की दो तेज बारिश में ही तैयारियों ने अपना असर दिखा दिया।
शहर के मोहल्ला ज्वाला नगर में ही कई जगहों पर खुले नाले हैं और इनसे हर रोज स्कूली बच्चों का गुजरना होता है। स्वार रोड का नाला भी एक तरफ से सुरक्षित है, जबकि दूसरी तरफ से यदि लबालब हो जाए तो यह किसी काल से कम नहीं। माला रोड के नाले में इतनी गंदगी है कि यहां से गुजरने पर तेज दुर्गंध उड़ती है। पनवड़िया के नाले में झाड़ियां इतनी उगी हैं कि यदि कोई गिर जाए तो मिलना मुश्किल है। यही हाल बी अम्मा गेट के नाले का भी है।
पालिका दावा करती है कि मानसून से पहले इन सभी नालों की तली झाड़ सफाई कराई गई और इन्हें कवर करा दिया गया, लेकिन हकीकत यह है कि सिर्फ इनके लिए छोटी दीवार उठा दी गई और रंगरोगन करा दिया गया, लेकिन इन्हें कवर फिर भी नहीं कराया गया।
हाल यह है कि अब नालों की तरफ कोई देखने वाला नहीं है। अभी मानसून बाकी है और तेज बारिश भी हो सकती है। ऐसे में यदि पहले से सुरक्षा नहीं रखी गई तो बड़ा संकट आ सकता है, जिससे लोगों के लिए मुसीबत हो सकती है।
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संसाधन पूरे फिर भी गंदगी
शहर को स्वच्छ रखने के लिए नगर पालिका के पास पर्याप्त संसाधन हैं। इनमें दो रोड स्वीपिंग मशीन, चार कंपेक्टर, पांच जेसीबी, डोर-टू-डोर कूड़ा उठाने के लिए 25 वाहन, इसके अलावा 12 ट्रैक्टर-ट्रॉलियां हैं। इसके साथ नाले सफाई के लिए स्पाइडर मशीन आई है।
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इन इलाकों में होता है जलभराव
नाले उफनाने पर शहर के तोपखाना, लाल कवर, मछली बाजार, कलकत्ता, घेर सरबदाल, घेर सैफुद्दीन, जेल रोड, बरेली गेट, मिस्टनगंज, राजद्वारा, शाहबाद गेट समेत कई इलाकों में जलभराव की स्थिति हो जाती है।
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बोले लोग...
मोहल्ले के नालों की सफाई के नाम पर इतिश्री कर ली गई। इन नालों में प्लास्टिक के गिलास, दोने-पत्तल, पॉलिथीन और अन्य चीजें पड़ी हुई हैं। नालों का बहाव रुक गया है। पानी का निकास न होने से इसका तेज बहाव हो जाता है। -खलील खां
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नालों की इस समय स्थिति खराब है। नालों के साथ नालियां भी चोक पड़ी हैं और इनमें मच्छर पनप रहे हैं। कई बार सफाई कर्मी सिल्ट निकालकर सड़क पर ही छोड़ देते हैं, जिससे आवागमन में दुर्गंध होती है। -महबूब
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जुलाई महीने में सफाई हुई थी, लेकिन इसके बाद पालिका ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। हाल यह है कि अधिकतर नाले खुले पड़े हैं, दुर्घटना न हो ऐसा कैसे हो सकता है। ध्यान न देने से आज नालों और नालियों दोनों की स्थिति काफी खराब हो चुकी है। -दानिश
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माला रोड पर तो इतनी खराब हालत थी, कुछ सुधार हुआ, लेकिन नाला खुला है, इसको कवर नहीं किया गया है। इस नाले को कवर करना बेहद जरूरी है। -जरीफ खां
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वर्जन
नालियों की सफाई नियमित तौर पर होती है और नालों की सफाई अभियान चलाकर कराई जा चुकी है। नालों को कवर भी कराया गया है, लेकिन जहां कहीं पर भी कवर नहीं हो सके, वहां पर टीम को लगा दिया गया है। जल्द ही सभी बेहतर हो जाएंगे। -दुर्गेश्वर त्रिपाठी, अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका, रामपुर