जिन अबोध बेटियों को हाथ-पांव बांधकर कूड़े के ढेर पर छोड़कर भागा पिता शहर से सटे फैजुल्लानगर का है। अमर उजाला में खबर छपने के बाद जब गांव वालों ने बच्चियों के फोटो देखे तो उस पर ताने कसे। इसके बाद वह उन्हें लेने पहुंचा, लेकिन गांव मंसूरपुर के रहने वाले ग्रामीणों ने उसका विरोध किया और बच्चियां नहीं ले जाने दीं।
रविवार को मंसूरपुर का एक युवक कोसी पुल की तरफ से गुजर रहा था। इस दौरान उसको झाड़ियों में दो छोटी बच्चियों को उसने वहां पर कूड़े के ढेर में बंधा देखा था। तमाम लोग वहां पहुंच गए। दोनों बच्चियों को हाथ खोलकर पूर्व ब्लाक प्रमुख के घर पर ले आए थे। बच्चियों द्वारा पूछने पर ढाई साल की तैयबा ने बताया कि उसकी छोटी बहन तानिया है।
दोनों को उसके पिता बांधकर चले गए थे। पूर्व ब्लाक प्रमुख मोहम्मद अकबर के घर पर उन दोनों बहनों को घर रख लिया गया था। सोमवार शाम एक व्यक्ति पूर्व ब्लाक प्रमुख के घर पहुंचा।
जो खुद को फैजुल्लानगर का रहने वाला रफी बता रहा है। उसका कहना है कि अखबार में छपने के बाद गांव वालों ने ताने कसे तो वह आया है। लेकिन ब्लाक प्रमुख ने उसे बच्चियां नहीं दी हैं।