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विरोध और हंगामे के बीच सीआरपीएफ ने खाली कराए मकान

Sat, 18 Mar 2017 12:24 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ रामपुर
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रामपुर मे बफर जोन के लिए मकान खाली कराते सीआरपीफ और पुलिस के जवान।
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आतंकी हमले के आठ साल बाद आखिरकार केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की सुरक्षा को लेकर शुरू की गई कवायद को तेज कर दिया गया है। प्रशासन ने बफर जोन के दायरे में आने वाले मकानों को विरोध और हंगामे के बीच खाली करा लिया। सीआरपीएफ बाउंड्री से सटे इन मकानों को खाली कराने से पहले ही मकान स्वामियों को करीब 42 करोड़ का मुआवजा दिए जाने की बात कही गई है। 

बता दें 31 दिसंबर 2007 की रात में  सीआरपीएफ ग्रुप सेंटर पर हुए आतंकी हमले में सात जवानों के शहीद हो जाने और एक रिक्शा चालक की मौत हो जाने के बाद देश भर में हड़कंप मच गया था। इस घटना को अंजाम देने वाले आतंकी तो पुलिस के हत्थे चढ़ गए थे साथ ही यह मामला अभी कोर्ट में विचाराधीन भी चल रहा है। आतंकी हमले के बाद सीआरपीएफ की सुरक्षा पर सवालिया निशान लगने लगे थे। केंद्रीय गृहमंत्रालय ने इस हमले के बाद ग्रुप सेंटर की सुरक्षा की समीक्षा की थी साथ ही इसके बाद फैसला हुआ था कि सीआरपीएफ की चारदीवारी से 90 मीटर की दूरी तक किसी भी प्रकार की कोई आबादी नहीं होगी।
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इसके बीच सीआरपीएफ की ओर से बफर जोन बनाया जाएगा। बफर जोन के लिए सीआरपीएफ ने आगापुर स्थित गेट के पास जमीन अधिग्रहण करने के लिए कवायद शुरू कर दी। करीब आठ साल के बाद अब  क बार फिर से यह मुद्दा गर्मा गया है। सीआरपीएफ ने प्रशासन से सीआरपीएफ गेट की जमीन को अधिग्रहण  कर लिया है। इसके लिए करीब 42 करोड़ रुपये का मुआवजा भी दे दिया गया है। इस कवायद के पूरा होने के बाद यहां पर अभी तक जमीन को सीआरपीएफ के हैंडओवर नहीं किया गया है। इस जमीन को हैंडओवर करने के लिए कवायद शुरू कर दी गई है। 
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शुक्रवार को एसडीएम सदर अभय गुप्ता, तहसीलदार समेत राजस्व परिषद से जुड़े अफसरों की टीम ने पुलिस को साथ लेकर मौके पर पहुंचे,जहां पुलिस की टीम ने यहां मकानों को खाली कराना शुरू कर दिया। इस दौरान विरोध के बीच 21 मकानों को खाली कराया गया। सीआरपीएफ जवानों की मौजूदगी में कराए गए कार्यक्रम के दौरान काफी संख्या में लोग मौजूद रहे। देर शाम तक इसको लेकर कवायद शुरू कर दी गई। पुलिस की मौजूदगी में मकानों को खाली कराने का काम शुरू किया गया तो कुछ लोगों ने इसका विरोध किया,लेकिना पुलिस की सख्ती के आगे विरोध ज्यादा देर तक नहीं चला।
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