सीआरपीएफ आतंकी हमले के मामले में बुधवार को कड़ी सुरक्षा के बीच सभी आठ आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया। हमले के बाद फिंगर प्रिंट लेेने वाले एक्सपर्ट ने कोर्ट में पेश होकर गवाही दी। उन्होंने पूर्व में दी गई रिपोर्ट की पुष्टि की। साथ ही कहा कि हमले के बाद उन्होंने ही मौके पर पहुंचकर फिंगर प्रिंट लिए थे। अब इस मामले की अगली सुनवाई दो जनवरी को होगी।
31 दिसंबर 2007 की रात को सीआरपीएफ ग्रुप सेंटर पर आतंकी हमला हुआ था, जिसमें सात जवान शहीद हो गए थे, जबकि एक रिक्शा चालक की भी मौत हो गई थी। हमले के चालीस दिन बाद एटीएस की टीम ने आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया था। तभी से यह सभी बरेली और लखनऊ की सेंट्रल जेल में बंद हैं। जेल में बंद आरोपियों में पाकिस्तान के मोहम्मद फारुख, इमरान शहजाद, बिहार के मधुबनी निवासी सबाउद्दीन उर्फ सबा, मुंबई के गोरे गांव निवासी फईम अरशद अंसारी, कौसर खां, गुलाब खां, मोहम्मद शरीफ हैं। इस मामले की सुनवाई कोर्ट में चल रही है।
बुधवार को भी मामले की सुनवाई हुई। सभी आरोपियों को कोर्ट में कड़ी सुरक्षा के बीच पेश किया गया। सुनवाई के दौरान अभियोजन की ओर से फिंगर प्रिंट लेने वाले एक्सपर्ट क्रांति कुमार को पेश किया गया, जहां उनकी गवाही हुई। गवाही में उन्होंने पूर्व में दिए गए बयान की पुष्टि की। साथ ही अपनी रिपोर्ट को भी साबित किया। एक्सपर्ट ने कहा कि उन्होंने ही हमले के बाद मौका ए वारदात पर पहुंचकर फिंगर प्रिंट लिए थे।
बचाव पक्ष की ओर से इस दौरान जिरह भी की गई, जिसका उन्होंने बखूबी जवाब दिया। उनकी गवाही पूरी हो गई है। अब इस मामले की सुनवाई दो जनवरी को होगी। सुनवाई के दौरान कड़ी सुरक्षा व्यवस्था रही।