रामपुर। नगर पालिका रामपुर की बोर्ड बैठकों में बनने वाली योजनाएं धरातल तक नहीं पहुंच पा रही हैं। लेटलतीफी और उपेक्षा के चलते कार्य रुके हुए हैं, जिससे आमजन समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। पालिका ने कई कामों में करोड़ों रुपये खर्च किए हैं। ये काम अभी भी अधूरे पड़े हैं।
इन कामों के कारण जनता को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। बैठकों से पहले सभासदों से प्रस्ताव मांगे जाते हैं। जनता अपनी समस्याएं दर्ज करा देती है और जब बैठक होती है तो खानापूर्ति के साथ कोरम पूरा किया जाता है। इसके बाद इन प्रस्तावों को पूरा करने पर ध्यान नहीं दिया जाता।
डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन -
शहर में दो साल पहले सफाई की व्यवस्था को निजी हाथों में देने की बात हुई थी। एक पीलीभीत की कंपनी ने इसमें हिस्सा लिया था और वार्डों का सर्वे भी किया था लेकिन बाद में बात न बन पाने की वजह से कंपनी चली गई। इसके बाद से अभी तक इसमें दोबारा किसी कंपनी से बात नहीं हो सकी है। लिहाजा अब डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन व्यवस्था ठप पड़ी है और सड़कों पर जगह-जगह कचरा पड़ा है। पालिका अपने दम पर कुछ क्षेत्र से डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन करवा रही है, जबकि कई क्षेत्रों में कूड़ें का कलेक्शन तक नहीं हो रहा है।
ट्रीटमेंट प्लांट-
शहर को 43 वार्डों में विभाजित किया गया है। बमनपुरी में अस्थायी ट्रंचिंग ग्राउंड बना हुआ है। इसमें 140 मीट्रिक टन कचरा आता है। यहां कूड़े के पहाड़ हैं, कुछ दिन पूर्व से इस कूड़े को यहां से शहजादनगर भेजा जा रहा है। इस कचरे का निस्तारण करने के लिए शहजादनगर में 25 एकड़ जमीन पर 15.60 करोड़ रुपये की लागत से ट्रीटमेंट प्लांट बनाया जाना था। पांच साल बाद यह बनकर तैयार हुआ है लेकिन अभी तक मशीनें नहीं लग पाई हैं। मशीनें लग जाती तो लोगों को बदबू और मक्खियों से निजात मिल जाती। पालिका को बार-बार कूड़े के ढेर में आग लगने पर उसे बुझाने पर होने वाले खर्च से निजात मिल जाती।
एबीसी सेंटर भी अभी तक शुरू नहीं हो पाया
नगर पालिका ने आवारा कुत्तों के बधियाकरण के लिए लाखों रुपये लगाकर एबीसी सेंटर बनाया था। इसमें कुत्तों को रखने के लिए 150 बाड़े बनाए हैं। जनवरी में एक कंपनी को कुत्तों का बधियाकरण करने के लिए 74.25 लाख रुपये का ठेका दिया गया था। अब तक कुत्तों का बधियाकरण शुरू नहीं हो पाया है।
85 लाख का एमआरएफ सेंटर-
हजरतपुर इलाके में अब से दो साल पहले एमआरएफ सेंटर यानी मैटेरियल रिकवरी फैसिलिटी सेंटर का निर्माण 85 लाख रुपये की लागत से कराया गया था। एमआरएफ सेंटर का मुख्य कार्य शहर के सूखे कचरे को इकट्ठा कर, उसे वैज्ञानिक तरीके से वर्गीकृत करना और पुनर्चक्रण योग्य सामग्री (प्लास्टिक, कागज, धातु, कांच) को अलग करके रिसाइकिलिंग इकाइयों तक पहुंचाना है। इस सेंटर में भी ताले लगे हैं।
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क्या कहते हैं लोग-
इस मौसम में कचरे में आग लग जाती है, जिससे धुआं होता है और सांस के मरीजों को काफी दिक्कत होती है। कचरे से बीमारियां भी हो रही हैं। मच्छर भी पनपते हैं। शिकायत के बाद भी सुनवाई नहीं हो सकी। -अतीक अहमद
कचरे के ढेर में आग लग जाने से धुआं काफी ज्यादा होता है और वायु प्रदूषण होने से यह हमारी सांसों में भी जाता है। इससे बीमारियां बनती है। कचरे का निस्तारण नहीं हो रहा है।
-अमीर अहमद
यहां मुख्य समस्या कचरे की है। कूड़े में आग लगने पर काफी परेशानी होती है। इस कचरे को यहां से हटना चाहिए। मोहल्ले के लोगों को काफी परेशानी हो रही है।
-लालाजी
कूड़े की बहुत परेशानी है। यहां पर कचरा जलने से लोगों को सांस की समस्या भी हो चुकी है। इस कचरे को इस मोहल्ले से हटाकर कहीं और ले जाना चाहिए, ताकि बीमारियां न पनप सकें।
-मो. रफी
वर्जन-
धीरे-धीरे सभी योजनाओं पर काम कराया जा रहा है। कुछ योजनाओं पर प्रक्रिया चल रही है। सभी कार्य पूर्ण करा लिए जाएंगे। जनता को किसी भी तरह की दिक्कत नहीं होने दी जाएगी।-दुर्गेश्वर त्रिपाठी, अधिशासी अधिकारी, रामपुर