ट्रेन की चपेट में आकर ठेकेदार के अधीन कार्य कर रहे रेलवे सफाईकर्मी की मौत हो गई। हादसे के वक्त सफाईकर्मी ट्रैक पर सफाई कर रहा था। घटना के बाद जीआरपी-आरपीएफ और रेलवे अफसरों के साथ ही ठेकेदार के रवैये को लेकर अन्य सफाईकर्मी भड़क गए। सफाईकर्मियों ने स्टेशन अधीक्षक के कार्यालय के सामने शव रखकर हंगामा शुरू कर दिया।
घंटों तक हंगामे के बाद समझाने पर बमुश्किल सफाईकर्मी शांत हुए। शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भिजवाया गया। सिविल लाइंस थाना क्षेत्र के आदर्श कालोनी निवासी चतुर लाल ठेकेदार के अधीन रेलवे स्टेशन पर सफाईकर्मी के रूप में कार्य करता था। गुरुवार सुबह छह बजे वह काम पर आया था।
स्टेशन से उसे सीआरपीएफ गेट के निकट ट्रैक की सफाई के लिए भेज दिया गया। इसी दौरान सियालदाह एक्सप्रेस की चपेट में आकर उसकी मौत हो गई। सूचना पर ठेकेदार के अधीन कार्य करने वाले तमाम सफाईकर्मी मौके पर पहुंच गए। सफाईकर्मियों का आरोप था कि घंटों तक जीआरपी, आरपीएफ, रेलवे अफसर और ठेकेदार मौके पर नहीं पहुंचे।
गुस्साए सफाईकर्मी परिजनों के साथ शव को रेलवे स्टेशन पर ले आए। स्टेशन अधीक्षक के कार्यालय के सामने शव रखकर हंगामा करने लगे। हंगामा होने पर ठेकेदार के सहायक भी स्टेशन अधीक्षक कार्यालय पर पहुंच गए। स्टेशन अधीक्षक के कार्यालय में सफाईकर्मियों ने अफसरों की मौजूदगी में नाराजगी जताते हुए हंगामा किया।
कई घंटे के हंगामे के बाद ठेकेदार की ओर से मुआवजा दिए जाने और सफाई कर्मियों की अन्य मांगों को मांगने पर लोग शांत हुए। शाम करीब साढ़े पांच बजे के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भिजवाया गया। हादसे के बाद जीआरपी-आरपीएफ और सिविल पुलिस सीमा विवाद में उलझी रही।
शव के पंचनामा भरकर पीएम के लिए भिजवाने और अन्य कार्यों को लेकर सीमा विवाद में उलझने से हुई देरी ने ही सफाईकर्मियों और परिजनों का गुस्सा भड़का दिया। हालांकि हर विभाग के अफसर अपनी कोई भी कमी होने से इंकार करते रहे।
ठेकेदार के अधीन सफाई करने वाले चतुर लाल की गुरुवार सुबह करीब 11 बजे सियालदाह एक्सप्रेस की चपेट में आने से मौत हो गई। हादसे की सूचना ट्रेन चालक की ओर से तुरंत कंट्रोल को दी गई। कंट्रोल से भी मैसेज पास कर दिया गया। इसके बावजूद जीआरपी-आरपीएफ, रेलवे प्रशासन और ठेकेदार के सहयोगी घटनास्थल पर समय से नहीं पहुंचे।
हादसा सीआरपीएफ क्रासिंग के निकट हुआ। जीआरपी और सिविल पुलिस सीमा क्षेत्र को लेकर उलझी रही। देरी पर सफाईकर्मियों और परिजनों का गुस्सा भड़क गया और हंगामा करना शुरू कर दिया। सिविल लाइंस थाना पुलिस ने शव का पंचनामा भरा, लेकिन तब तक सफाई कर्मियों और परिजनों का गुस्सा काफी भड़क चुका था।
उन्होंने शव स्टेशन अधीक्षक के कार्यालय के बाहर रखकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। बेटी के हाथ पीले करने के लिए दिन-रात मेहनत कर रहे पिता की आंखों का यह ख्वाब पूरा नहीं हो सका। इससे पहले ही उसकी आंखें हमेशा के लिए बंद हो गईं। ट्रेन की चपेट में आकर मरे चतुर लाल की बेटी शिवानी की नवंबर माह में शादी है।
बेटी की शादी को लेकर घर में खुशियों के माहौल के बीच तैयारियां चल रहीं थीं। हादसे में न सिर्फ चतुरलाल, बल्कि उसके घर की कई खुशियों की भी मौत हो गई। बच्चों से पिता का साया छिन गया तो कन्यादान की आस लगाए पिता चतुर लाल इससे पहले ही मौत की नींद सो गया।
चतुर लाल ने अपनी बेटी शिवानी की नगर में ही एक युवक से शादी तय कर दी थी। शिवानी की शादी नवंबर माह में होनी थी जिसके लिए तैयारियां चल रहीं थी। इस बीच गुरुवार को हुए हादसे ने शादी की खुशियों को गम में बदल दिया। गुरुवार को हुए हादसे ने रेलवे में चल रहे ठेकेदारी के नेटवर्क की भी पोल खोल दी।
जिस कंपनी को सफाई का ठेका दिया गया है वो दिल्ली की है। हादसे की सूचना पर पहुंचा ठेकेदार संभल का था। इतना ही नहीं सफाईकर्मियों ने विभागीय अफसरों और ठेकेदारों पर कई अन्य गंभीर आरोप भी लगाए। गुरुवार को सियालदाह एक्सप्रेस की चपेट में आए चतुर लाल की मौत ने रेलवे में हो रहे कार्यों की प्रणाली पर भी सवाल खड़े किए हैं।
स्टेशन पर सफाई का ठेका दिल्ली की कंपनी एलीना को दिया गया है। उसने अपने स्तर से ये कार्य कई युवकों को दे दिया है। इनमें एक ठेकेदार आरिफ संभल का रहने वाला बताया गया। ऐसे में सवाल उठता है कि दिल्ली की कंपनी का ठेकेदार क्या सही ढंग से पूरे सुरक्षा इंतजामों और मानकों के अनुसार सफाईकर्मियों से कार्य करवा सकता है।
इतना ही नहीं सफाई कर्मियों ने वेतन में से पीएफ कटौती की बात कहते हुए आरोप लगाया कि इसकी कोई स्लिप नहीं दी जाती है। नियम विरुद्ध तरीके से कार्य क्षेत्र से बाहर भी कार्य करवाया जाता है। गुरुवार को हादसे के बाद भी सफाईकर्मियों का आरोप था कि उनसे नोटीफाइड एरिया से बाहर कार्य कराया जा रहा था।