खनन माफिया उत्तराखंड सीमा में भी घुस गए। भनक लगने पर काशीपुर और रुद्रपुर का प्रशासन सतर्क हो गया। उत्तराखंड की सीमा पर पीएसी तैनात कर दी गई। उत्तराखंड के अधिकारियों और पुलिस ने छापेमारी कर खनन माफिया को यूपी की सीमा में दोबारा खदेड़ दिया।
खनन माफिया ने स्वार के पट्टीकलां और अकबराबाद इलाके में कई किलोमीटर तक कोसी नदी पर कब्जा कर लिया है। कोसी में खनन माफिया दिन-रात खनन कर रहे हैं। किसान रविवार रात हिम्मत जुटाकर कोसी पर पहुंचे तो माफिया ने फायरिंग कर उन्हें खदेड़ दिया।
खनन माफिया कई जेसीबी और पोपलेन लेकर सोमवार रात काशीपुर के आईटीआई थाना क्षेत्र अजीतपुर, मुकंदपुर और रुद्रपुर के सुल्तानपुर की में घुस गए। जेसीबी और ट्रकों की रोशनी देखकर कुछ पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे। खनन माफिया की तादाद करीब 300 के आसपास थी। लिहाजा पुलिसकर्मी वापस लौट आए।
उन्होंने रुद्रपुर और काशीपुर के अधिकारियों को सूचना दी। अवैध खनन की जानकारी मिलने पर उत्तराखंड के अधिकारी सतर्क हो गए। काशीपुर और रुद्रपुर के अधिकारियों ने पुलिस को साथ लेकर संयुक्त रूप से अपनी सीमा में कोसी घाटों पर छापेमारी कर खनन माफिया को दोबारा यूपी की सीमा में खदेड़ दिया।
यूपी की सीमा पर कोसी नदी के खादर में पीएसी तैनात कर दी गई। हालांकि जिला प्रशासन और पुलिस ने अवैध खनन रोकने के लिए कोई कार्रवाई नहीं की है। दूसरी और बिलासपुर और भोट इलाके में भी काफी समय से अवैध खनन हो रहा है।
आखिर ऐसी कौन सी मजबूरी है कि कोसी में इतने बड़े पैमाने पर अवैध करने वालों पर अधिकारी और पुलिस हाथ नहीं डाल रही है। डीएम के आदेशों का भी पालन नहीं किया जा रहा है। उत्तराखंड के अधिकारियों ने चंद घंटों में ही माफिया को यूपी में खदेड़ दिया।
स्वार क्षेत्र में कोसी नदी पर करीब एक महीने से बड़े पैमाने पर अवैध खनन हो रहा है। दूसरे जिलों के माफिया यहां आकर गरीब किसानों की फसल तबाह कर रहे हैं। किसानों में खौफ पैदा करने के लिए खनन माफिया ने पूरे इलाके में अपने हथियार बंद गार्ड तैनात कर दिए। किसान संगठन अवैध खनन रोकने के लिए धरना प्रदर्शन कर रहे हैं।
अधिकारियों के पास भी शिकायतें पहुंच रही हैं। भाकियू के मंडल उपाध्यक्ष हसीब अहमद के नेतृत्व में सोमवार को किसान डीएम से भी मिले थे। डीएम ने एसडीएम स्वार को छापेमारी करने के आदेश दिए थे। अभी तक छापेमारी नहीं की है। माफिया रात उत्तराखंड की सीमा में घुस गए थे।
सवाल ये उठ रहा है कि जिले के प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस के सामने ऐसी मजबूरी है कि एक महीने में भी अवैध खनन नहीं रुक सका। छापेमारी की बात तो दूर अधिकारी और पुलिस अभी तक मौके पर जाने की हिम्मत भी नहीं जुटा सके हैं। अधिकारियों से जब बात की जाती है तो वो एक दूसरे पर टाल देते हैं।