बरेली में बस में महिला के साथ सामूहिक बलात्कार की घटना ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर फिर सवालिया निशान लगा दिए हैं। इस घटना से दिल्ली में हुए निर्भया कांड की याद फिर ताजा हो गई। निर्भया कांड के बाद बसों और अन्य सवारी वाहनों में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर कई बातें की गई थीं। पूरे देश में आंदोलन हुआ था। अब बरेली में हुई इस घटना के बाद ये फिर साफ हो गई है कि महिलाओं के लिए बसों और आटो में अकेले सफर करना कितना मुश्किल है।
उनकी सुरक्षा के लिए अभी भी कोई कारगर उपाय नहीं हुए हैं। महिलाएं अकेले सफर कैसे करें? इसको लेकर अब उनमें चिंता पैदा होने लगी है। महिलाएं न तो घर में सुरक्षित हैं और न ही सड़कों पर। रेप, छेड़छाड़ समेत महिला उत्पीड़न के आंकड़े तो इसी बात की गवाही दे रहे हैं। ट्रेनों के साथ ही बसों और आटो में महिलाओं का अकेले सफर करना सुरक्षित नहीं है। प्रत्येक वाहन पर पुलिस कंट्रोल रूम का नंबर लिख दिया जाता है, ताकि छेड़छाड़ या अन्य घटना होने पर तुरंत पुलिस से संपर्क किया जा सके, लेकिन वो भी नहीं हो पाता है।
बरेली के शीशगढ़ थाना क्षेत्र में महिला के साथ बस में हुई गैंगरेप की घटना के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर फिर सवालिया निशान लग गए हैं। गैंगरेप की शिकार महिला अपने 14 दिन के मासूम बच्चे की जान भी गंवा बैठी। हालांकि पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए मुकदमा दर्ज कर लिया, लेकिन पुलिस और सरकार की ओर से निर्भया कांड के बाद महिला सुरक्षा को लेकर किए गए तमाम दावे की पोल फिर खुल गई।
आज भी सवारी वाहनों में महिलाओं का अकेले सफर करना वैसा ही है, जैसे निर्भया कांड से पहले था। बसों और आटों में सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं हैं। आए दिन महिलाओं के साथ अभद्र व्यवहार की घटनाएं होती है, लेकिन इस पर कोई कार्रवाई नहीं होती है।