रामपुर। शहर को गंदगी से निजात दिलाने और जगह-जगह लगे कूड़े के ढेरों का निस्तारण करने के लिए रामपुर में कूड़ा निस्तारण प्लांट को मंजूरी मिली थी, जिस पर मार्च माह में काम शुरू हो गया था। लेकिन कार्यदायी संस्था की अनदेखी और सुस्ती की वजह से अब तक महज 20 फीसदी ही काम पूरा हो सका है। जबकि अगस्त 2022 तक प्रोजेक्ट पूरा करना था। ऐसे में अफसरों की अनदेखी के चलते यह संभावना कम है कि प्रोजेक्ट तय समय में पूरा हो सके।
प्रदेश सरकार की ओर से शहर को गंदगी से मुक्त कराने और पर्यावरण संरक्षण के लिए कूड़ा निस्तारण प्लांट को मंजूरी दी थी। सपा सरकार में मंजूर हुए इस प्रोजेक्ट का तत्कालीन नगर विकास मंत्री मोहम्मद आजम खां ने शिलान्यास भी कर दिया था, इसके बाद सीएंडडीएस ने प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए करीब चार करोड़ रुपये की लागत से चहारदीवारी बनाई। शहजादनगर में 25 एकड़ जमीन पर बनने वाले इस प्लांट को पीपीपी मॉडल के आधार पर मैसूर की कंपनी को दे दिया था, लेकिन कंपनी इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू नहीं कर सकी थी। इसके बाद तो सूबे में सरकार भी बदल गई और प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में पड़ गया।
नगर पालिका की ओर से फिर से प्रयास किए गए। प्रोजेक्ट की नए सिरे से करीब 17 करोड़ रुपये की डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) बनाकर शासन को भेजी गई। शासन ने 15.60 करोड़ रुपये की डीपीआर को मंजूरी दे दी थी, जिसके बाद टेंडर प्रक्रिया हुई। मार्च माह में सीएंडडीएस की ओर से काम शुरू कराया गया। अफसरों का दावा था कि अगस्त 2022 तक प्रोजेक्ट को पूरा कर लिया जाएगा। लेकिन अब सिर्फ एक माह का समय ही बचा है, महज 20 फीसदी ही काम हो सका है। यह संभावना भी बेहद कम है कि आगामी दिनों में काम रफ्तार पकड़ ले। लिहाजा, तय समय में कैसे प्रोजेक्ट पूरा होगा।