कोहरे साथ गिरे पाले ने सर्दी के सितम को और बढ़ा दिया है। मौसम में गलन और
ठिठुरन बढ़ गई। दिनभर धूप न निकलने से लोग कांपने पर मजबूर हो गए। सर्द
हवाओं के कारण हाथ-पैर भी सुन्न हो गए। जनवरी के अंत में जब सर्दी कम
होने के दिन शुरू होते हैं तो इस बार सर्दी ने अपना असली रंग अख्तियार किया
है।
जाती हुई सर्दी के इस मिजाज ने लोगों को बेहाल कर दिया है। बुधवार के
बाद गुरुवार को भी मौसम काफी सर्द रहा। बुधवार को दिन में कुछ देर के लिए
धूप निकली थी, लेकिन गुरुवार को पूरे दिन सूर्य देव के दर्शन नहीं हुए।
इससे सर्दी का सितम और भी बढ़ गया। पहाड़ों पर बर्फबारी और मैदानी इलाकों
में बारिश के कारण पारा तेजी से लुढ़का है।
गुरुवार को दिनभर सर्द हवाएं
चलती रहीं और बादल भी छाए रहे। सुबह के समय घने कोहरा छाने के साथ ही पाले
की बूंदें भी गिरीं। हर साल ऐसा मौसम दिसंबर अंत या जनवरी शुरुआत में रहता
था। मकर संक्रांति के बाद मौसम में सुधार होता है, लेकिन इस बार मकर
संक्रांति के बाद ठंड कम होने के बजाए लगातार बढ़ रही है।
सर्दी के मौसम
में ठंड के इस यू टर्न ने लोगों को बेहाल कर दिया है। गुरुवार को ठंड के
कारण हाथ-पैर सुन्न से पड़ने लगे हैं।