इसे अफसरों की सुस्ती कहें या फिर कुछ और मगर, नगर विकास मंत्री आजम खां की ख्वाहिश पर पानी फिर रहा है। शहर को सिटी बसों का तोहफा तो दे दिया गया, लेकिन यह तोहफा आधी अधूरी तैयारियों के बीच ही लटक गया है। दो बसें फिलहाल रोडवेज बस स्टैंड में ही खड़ी हैं, जबकि दो बसों को कौशांबी के लिए चलाया गया यानि शहर में फिलहाल कोई बस नहीं चल रही है। इसका कारण यह बताया जा रहा है कि स्थानीय अधिकारी अभ्ाी तक बसों का स्टापेज भी तय नहीं कर पाएं हैं। वहीं शहर को मिलने वाली चार वाल्वो समेत 44 बसों का दूर-दूर तक पता नहीं है।
नगर विकास मंत्री आजम खां बेशक शहर को मार्डन बनाना चाहते हैं। यही वजह है कि शहर में तमाम ऐसे विकास कार्य कराए जा रहे हैं जो आसपास के जिलों में नहीं हो पाए हैं। शहर में सिटी बस चलाने की घोषणा यूं तो साल भर पहले की गई थी, लेकिन साल भर के बाद अब शहर को सिटी बसों के संचालन का तोहफा भी दे दिया गया। चुनाव की घोषणा से ऐन पहले तमाम विकास कार्यों का लोकार्पण नगर विकास मंत्री कर रहे हैं। इसी में से शहर को सिटी बस का तोहफा भी देने की भी कवायद है। दो दिन पहले नगर विकास मंत्री ने सिटी बसों को दौड़ाने के लिए हरी झंडी दी थी। सिटी बस के संचालन को हरी झंडी तो दे दी गई, लेकिन इस सपने को जमीन पर नहीं उतारा जा सका है।
इसकी वजह कहीं न कहीं सरकारी सिस्टम की लापरवाही भी है। शहर में सिटी बस के लिए यूं तो कुल 48 बसें स्वीकृत हैं, जिसमें आठ वाल्वो बसों को भी शामिल किया गया है, लेकिन पहले चरण में परिवहन विभाग को चार बसें ही मिल पाई थीं, जिसके जरिए नगर विकास मंत्री ने इसका उद्घाटन भी किया। उद्घाटन के बाद चार बसों में से दो बसों को गुुरुवार से कौशांबी के लिए ट्रायल के रूप में उतार दिया गया, जबकि दो बसें अभी भी रोडवेज में ही खड़ी हैं। इसकी वजह इन दोनों गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी न होना भी बताई गई है। इसके अलावा इन बसों का रूट भी तय न हो पाना है।
नगर पालिका परिषद के माध्यम से इन बसों का संचालन होना है इसलिए रूट व बस के स्टापेज भी इसको ही तैयार करना है। यानि कुल मिलाकर अभी तक सिटी बसों को शहर की सड़कों पर नहीं उतारा गया है। यह बसें कब उतरेंगी इसको लेकर अभी तक स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है। फिलहाल तो इंतजार ही लोगों का विकल्प रह गया है।