रामपुर बुशहर। सीटू ने वीरवार को केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। इस दौरान संगठन ने केंद्र और प्रदेश सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। राष्ट्रीय कमेटी और केंद्रीय ट्रेड यूनियन के आह्वान पर यह प्रदर्शन किया गया। इस दौरान संगठन ने 4 मजदूर विरोधी काले कोडों, 3 किसान विरोधी काले कानूनों और बिजली विधेयक 2020 के विरोध में प्रदर्शन किया। इस दौरान सीटू कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और इन काले कानूनों को वापस लेने की मांग उठाई।
प्रदर्शन को संबोधित करते हुए सीटू शिमला जिलाध्यक्ष कुलदीप सिंह, 412 मेगावाट परियोजना यूनियन के उपाध्यक्ष राज, उत्तम और कोटगाड़ परियोजना मजदूर यूनियन के अध्यक्ष कुलदीप नेगी ने कहा कि केंद्र सरकार जबसे सत्ता में आई है, तब से लगातार तानाशाहीपूर्ण फैसले लेकर पूंजीपतियों के हित और मजदूर और किसान विरोधी निर्णय ले रही है। 44 श्रम कानूनों को खत्म करके मजदूर विरोधी 4 श्रम संहिताएं, लेबर कोड बनाना और 3 किसान विरोधी काले कानून इसका सबसे बड़ा उदाहरण है।
कोरोनाकाल का फायदा उठाते हुए केंद्र और भाजपा समर्थित राज्यों सरकारों ने आम जनता, मजदूरों और किसानों के आपात काल को पूंजीपतियों और कॉरपोरेट्स के लिए अवसर में तबदील कर दिया है। मजदूरों के 44 कानूनों को खत्म करने, सार्वजनिक क्षेत्र को बेचने के साथ ही किसान विरोधी 3 कानूनों को पारित करने से यह साबित हो गया है कि यह सरकार मजदूर, कर्मचारी और किसान विरोधी है।
देश के सार्वजनिक संसाधनों को सरकार पूंजीपतियों को बेच रही है। इससे लगातार महंगाई बढ़ रही है, जिसे रोकने में सरकार असफल साबित हुई है। पेट्रोल और डीजल के दाम अंतरराष्ट्रीय बाजार में कम हुए हैं, लेकिन देश में इनके दाम लगातार बढ़ रहे हैं। उन्होंने चेताया कि अगर केंद्र और प्रदेश सरकार मजदूर विरोधी निर्णय लेने से पीछे नहीं हटती तो आने वाले समय में मजदूर किसान उग्र प्रदर्शन करेंगे।
उन्होंने कहा कि मजदूर वर्ग 26 मार्च को भारत बंद, 28 मार्च को श्रम और किसान विरोधी कानूनों की प्रतियों को जलाकर आंदोलन करेगा। इस मौके पर सतीश, घनश्याम, शेर सिंह, सुरजीत, विद्या, शीला, नरेश, बेगा नंद, प्रकाश और अन्य कार्यकर्ता मौजूद रहे।