नोटबंदी के बाद खाली हुई जेबों के बाद लोग कैशलेस भुगतान की ओर बढ़ रहे हैं। दो दिन से बैंक बंद हैं और एटीएम भी रुपये नहीं उगल रहे हैं, ऐसी स्थिति में एटीएम कार्ड लिए घूम रहे ग्राहक दुकानदारों से खुद ही पूछ रहे हैं कि क्या स्वाइप मशीन है?
पेट्रोल, दवाओं के साथ ही दूध, ब्रेड आदि सामान के लिए भी पेटीएम के जरिये भुगतान किया जा रहा है। पिछले 15 दिनों में डिजिटल भुगतान के प्रति तस्वीर काफी बदली हुई नजर आ रही है। एक अनुमान के मुताबिक, करीब 25 फीसदी लोग आनलाइन भुगतान करने लगे हैं।
दो दिन से बैंकें बंद हैं, चौथे शनिवार फिर रविवार की वजह से बैंकों तो बंद हैं, एटीएम में भी रुपये नहीं हैं। भारतीय स्टेट बैंक की मुख्य शाखा के एटीएम पर इतनी लंबी
लाइन लगी थी कि कई घंटे में एटीएम तक पहुंचने का नंबर आए। रविवार को जब अमर उजाला टीम ने ग्राहकों की रोजमर्रा की वस्तुओं की खरीददारी कैसे हो रही है यह जानकारी ली तो रामपुर शहर में काफी बदला हुआ नजारा सामने आया। अधिकांश दुकानदार डिजिटल पेमेंट पर आधारित लेन देन करने लगे हैं। कहीं पेटीएम, ई-वालेट तो कहीं स्वाइप मशीन से भुगतान किया जा रहा है।