क्राप कटिंग के आंकड़ों ने किसानों को करोड़ों रुपये की चपत लगा दी है। नेशनल एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी ने बीमित किसानों की जो सूची जारी है, उसमें जिले के पैगा गांव के आठ किसानों को सिर्फ 196 रुपये का क्लेम मिला है।
एक बीमित किसान के हिस्से में दो से 50 रुपये तक ही आएंगे। कागजों में सिर्फ बिलासपुर के दो और शाहबाद के पांच गांवों में सूखे से मामूली नुकसान दर्शाया गया है। दोनों ब्लाकों के सात गांवों के 600 किसानों को क्लेम के सिर्फ 4.25 लाख रुपये मिले हैं। वहीं, किसानों का कहना है कि ऐसे क्लेम देकर उनका मजाक उड़ाया जा रहा है।
खरीफ फसल 2015-16 में जिला सहकारी बैंक (डीसीबी) ने 49816 किसानों से 209 करोड़ का बीमा कर प्रीमियम के रूप में 4.38 करोड़ रुपये वसूले थे। खरीफ सीजन के दौरान जिले में सूखा पड़ा था। बारिश के आंकड़ों के आधार पर शासन ने जिले को सूखाग्रस्त घोषित किया था। बीमित किसान मान रहे थे कि बीमा का क्लेम मिलने से नुकसान की कुछ भरपाई हो सकेगी।
क्राप कटिंग के सरकारी आंकड़ों ने किसानों को करोड़ों का नुकसान पहुंचा दिया। बीमा कंपनी ने बीमित 11464 किसानों को ही क्लेम के रूप में 2.97 करोड़ रुपये जारी किए हैं। प्रशासन की रिपोर्ट में अगर 33 प्रतिशत का भी नुकसान दर्शा दिया जाता तो क्लेम के रूप में डीसीबी के बीमित किसानों को 60 करोड़ मिल जाते। किसानों का कहना है कि खरीफ की फसल में 50 प्रतिशत से ज्यादा नुकसान पहुंचा था। बीमा कंपनी ने सैदनगर के पैगा गांव में 8 किसानों को 196 रुपये 75 पैसे क्लेम के रूप में जारी किए हैं।
इन किसानों के हिस्से में सिर्फ दो रुपये से लेकर 50 रुपये तक ही हिस्से में आएंगे। इसी तरह पीपली नायक के 467 किसानों को 30762 रुपये का क्लेम दिया गया है। इन किसानों को भी अधिकतर पांच रुपये से लेकर 80 रुपये ही हिस्से में आएंगे। सरकारी रिपोर्ट में बिलासपुर के कुंदनखेड़ा, पहाड़पुर, शाहबाद के ऊंचागांव, परौता, ओसी, बड़ागांव, जयतौली, दिवियानगला, कैशवनगला, धुरियाई और डोहरिया में ही सूखा पड़ना दर्शाया गया है।