भाई-बहन के स्नेह और प्रेम का प्रतीक पर्व भैया दूज शुक्रवार को जिलेभर में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। बहनों ने भाई के माथे पर रोली-अक्षत से तिलककर उनकी दीर्घायु की कामना की। भाइयों ने बहन को उपहार दिए। कार्तिक मास की द्वितीया तिथि पर शुक्रवार को भैया दूज का पर्व मनाया गया।
पंडित संतोष शर्मा ने बताया कि द्वितीया तिथि गुरुवार रात 11:55 बजे से शुरू हो गई, जोकि 13 नवंबर की आधी रात के बाद तक रहेगी। हालांकि भाई के तिलक के लिए सबसे शुभ मुहूर्त दोपहर करीब एक बजे के बाद से तीन बजकर दस मिनट तक रहा।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार आज ही कि तिथि में यम अपनी बहन यमुना के बुलावे पर उसके पास पहुंचे थे। इसी कारण इस दिन भाई-बहन के यमुना में स्नान का विशेष महत्व है। भैया दूज पर बहनों ने भाई के तिलक कर मुंह मीठा कराया और मिष्ठान के साथ ही नारियल गोला भी दिया।
बहन ने भाई की दीर्घायु की कामना करते हुए ईश्वर से भाई की सुख-समृद्धि और सभी विपत्तियों से रक्षा करने की भी कामना की। भैया दूज पर नारियल गोले और मिठाई की जबरदस्त बिक्री हुई। इसके साथ ही फलों की भी खूब बिक्री हुई। दो दिन पूर्व तक तक जो नारियल गोला 200 रुपये प्रतिकिलो तक के भाव में बिक रहा था।
उसके दाम शुक्रवार को ढाई सौ से पौने तीन सौ रुपये तक पहुंच गए। इसके साथ ही मिठाई की भी खूब बिक्री हुई। मिठाई की दुकानों पर सुबह से दोपहर तक भारी भीड़ रही। इसके साथ ही फलों की बिक्री भी बढ़ने के कारण दामों में उछाल रहा। केले और संतरे की बिक्री सबसे अधिक हुई। इनके दामों में दस से बीस रुपये तक की बढ़ोत्तरी भी हुई।