रामपुर। करीब दो साल पहले नगर पालिका बोर्ड की बैठक में बापू मॉल की दुकानों के आवंटन का प्रस्ताव पास होने के बाद भी अब तक सिर्फ 103 दुकानों का ही आवंटन हो सका है। 213 दुकानें अब भी आवंटित होने से रह गई हैं, जबकि 16 हालों में एक भी हाल आवंटित नहीं हो सका है। वजह है कि दुकानों का किराया अधिक है, जबकि नगर पालिका के अफसरों ने दुकानों का किराया मानक के अनुसार ही तय करने की बात कही है।
समाजवादी सरकार में शहर में बापू मॉल के निर्माण को मंजूरी मिली थी। करीब बीस करोड़ रुपये की लागत से बने इस मॉल में 316 दुकानें एवं 16 हॉलों का निर्माण किया गया था। मॉल का निर्माण सीएंडडीएस (कंस्ट्रक्शन एंड डिजाइन सर्विसेज) की ओर से किया गया था। निर्माण कार्य पूरा होने पर इसे नगर पालिका को हस्तांतरित कर दिया गया। तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने रामपुर आकर मॉल का उद्घाटन भी किया था, लेकिन इसके बाद दुकानों का आवंटन नहीं हो सका था। हालांकि, भाजपा की सरकार बनने के बाद नगर पालिका बोर्ड की बैठक दो बार दुकानों के आवंटन का प्रस्ताव रखा गया था, लेकिन सभासदों के विरोध के बाद प्रस्ताव पास नहीं हो सका। 26 अगस्त 2019 को हुई बोर्ड की बैठक में यह प्रस्ताव पास हुआ, जिसके बाद नगर पालिका की ओर से दुकानों के आवंटन की निविदा निकाली गई थी। नगर पालिका की ओर से दुकानों का किराया भी तय कर दिया गया था।
नगर पालिका बोर्ड की बैठक में प्रस्ताव पास होने के करीब तीन साल बीतने के बाद भी सभी दुकानों का आवंटन नहीं हो सका है। अब तक सिर्फ भूतल की ही 103 दुकानें आवंटित की जा सकी हैं, जबकि बाकी दुकानें खाली पड़ी हैं। इसका मुख्य कारण दुकानों का किराया एवं प्रीमियम का अधिक होना है। यदि इन दुकानों का किराया और प्रीमियम कम होता, तो शायद दुकानें आवंटित करने में आसानी होती और अब तक यह काम हो भी गया होता। वहीं, नगर पालिका के अधिकारियों की मानें तो दुकानों का किराया एवं प्रीमियम नियमों के अनुरूप ही तय किया गया है। यह न तो इससे अधिक हो सकता था और न ही कम। अब चाहे दुकानें आवंटित हों पाएं अथवा नहीं। हालांकि, नगर पालिका की ओर से दुकानों के आवंटन के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।