आजम को सता रहा रामपुर पर पकड़ कमजोर होने का डर
रामपुर में आजम खां का दबदबा रहा है। वो दस बार विधायक चुने गए, एक बार सांसद रहे और एक बार राज्यसभा के सदस्य रहे। उनके पुत्र अब्दुल्ला आजम दो बार विधायक जरूर बने, लेकिन दोनों बार उनकी विधायकी चली गई । आजम खां की पत्नी डॉ. तजीन फात्मा विधायक के साथ-साथ राज्यसभा की सदस्य भी रही हैं।
आजम खां पत्नी और बेटे सहित जेल में हैं। सजायाफ्ता होने की वजह से तीनों फिलहाल चुनाव नहीं लड़ सकते हैं। आजम खां के विरोधियों का आरोप है कि रामपुर सीट से अपनी पकड़ को बरकरार रखने के लिए आजम खां ने पार्टी को प्रत्याशी के फेर में उलझाने की कोशिश की।
ताकि इस सीट पर उनकी पकड़ बनी रही। लेकिन आजम खान का यह दांव तो नहीं चला, बल्कि उनके करीबी भी टिकट से हाथ धो बैठे। ऐसे में आजम खां के करीबियों का बसपा का समर्थन करने से रामपुर सीट पर समीकरण और उलझते नजर आ रहे हैं।
पूर्व जिलाध्यक्ष के बसपा के लिए प्रचार करने के मामले में हाईकमान को अवगत कराया है, जैसे भी निर्देश होंगे कार्रवाई करेंगे। अन्य समर्थकों की भी रिपोर्ट दी है, लेकिन अभी कोई निर्देश नहीं मिले हैं। - अजय सागर, जिलाध्यक्ष सपा