रेडिको खेतान डिस्टलरी में आबकारी के दो सिपाहियों की मौत के मामले की तफ्तीश बदायूं पुलिस से कराए जाने और मामले में फाइनल रिपोर्ट (एफआर) लगाने पर प्रदेश के नगर विकास मंत्री आजम खां ने कड़ी नाराजगी जताई है। आजम खां ने डीजीपी को पत्र लिखकर पूछा है कि मामला रामपुर से संबंधित था।
किसके दबाव में आईजी बरेली ने इसकी तफ्तीश बदायूं पुलिस को सौंपी। बदायूं पुलिस ने संबंधित सीओ को जानकारी दिए बिना मामले में एफआर लगा दी और रिपोर्ट कोर्ट में भेज दिया। आजम खां ने अपने पत्र में कहा कि क्या रामपुर पुलिस इस काबिल नहीं है कि वो किसी मामले की जांच कर सके? रामपुर की एसपी साधना गोस्वामी और सीओ सिटी आले हसन को बेहतर कामकाज के लिए जाने जाते हैं।
फिर जांच क्यों बदली गई? कहा कि मार्च 2015 में डिस्टलरी में ड्यूटी पर तैनात आबकारी के दो सिपाहियों की मौत हो गई थी। तफ्तीश रामपुर की पुलिस कर रही थी, लेकिन अचानक जांच बदायूं पुलिस को क्यों दी गई? आजम खां ने अपने पत्र में सितंबर माह के दौरान डिस्टलरी में चार मजदूरों की मौत के मामले में भी एफआर लगा दिए जाने पर सवाल उठाया है। उन्होंने डीजीपी से पूछा है कि क्या गरीबों की जान की कोई कीमत नहीं है।