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Rampur News: आजम को झटका, शत्रु संपत्ति मामले में जमानत खारिज

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रामपुर। शत्रु संपत्ति के रिकार्ड से छेड़खानी के मामले में बढ़ाई गई धाराओं में सपा नेता आजम खां को कोर्ट ने झटका दिया है। एमपी-एमएलए मजिस्ट्रेट कोर्ट ने उनका जमानत प्रार्थना पत्र निरस्त कर दिया। इस मामले में पुलिस ने धोखाधड़ी से जुड़ी धाराओं को बढ़ाया गया था।
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शत्रु संपत्ति का यह मामला 2020 से जुड़ा हुआ है। 2020 में रिकार्ड रूम प्रभारी फरीद अहमद की ओर से सिविल लाइंस थाने में मामला दर्ज कराया था,जिसमें सपा नेता पर धोखाधड़ी कर रिकार्ड रूम में रिकार्ड से छेड़खानी करने का आरोप लगा था। इस मामले की तफ्तीश के बाद पुलिस ने सपा नेता आजम खां के खिलाफ पुलिस ने जांच करते हुए चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की थी। पुलिस की इस चार्जशीट में धारा 218 के साथ ही 420, 467, 471, 120 बी, 201 लगाई गई थी। इस मामले में सपा नेता की ओर से अपने अधिवक्ता के माध्यम से कोर्ट में जमानत के लिए प्रार्थना पत्र दिया गया था। एमपी-एमएलए मजिस्ट्रे्ट कोर्ट में इस मामले में सुनवाई चल रही थी। बृहस्पतिवार को इस मामले में कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया। अभियोजन अधिकारी स्वदेश शर्मा ने बताया कि इस मामले में एमपी-एमएलए मजिस्ट्रेट शोभित बंसल की कोर्ट ने सपा नेता आजम खां की जमानत याचिका को खारिज कर दिया। सपा नेता इस वक्त रामपुर जेल में बंद हैं।

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2020 में रिकार्ड रूम प्रभारी ने दर्ज कराया था केस
शत्रु संपत्ति के जिस मुकदमे में पुलिस ने अग्रिम विवेचना के बाद तीन धाराएं बढ़ाई थीं, वह मुकदमा कलक्ट्रेट के रिकार्ड रूम के सहायक अभिलेखपाल मोहम्मद फरीद की ओर से सिविल लाइंस थाने में नौ मई 2020 को दर्ज कराया गया था। इसमें पहले लखनऊ के पीरपुर हाउस निवासी सैयद आफाक अहमद व अज्ञात के खिलाफ प्राथमिकी हुई थी। यह शत्रु संपत्ति आजम खां की जौहर यूनिवर्सिटी के आसपास थी, जो इमामुद्दीन कुरैशी पुत्र बदरुद्दीन कुरैशी के नाम दर्ज थी। इमामुद्दीन कुरैशी विभाजन के समय देश छोड़कर पाकिस्तान चले गए थे। वर्ष 2006 में यह संपत्ति शत्रु संपत्ति के रूप में राजस्व अभिलेखों में दर्ज कर ली गई थी।
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ट्रस्ट के सदस्यों को बनाया गया है आरोपी
रामपुर। भूमि के रिकॉर्ड की जांच करने पर पता चला था कि राजस्व विभाग के रिकार्ड में फर्जीवाड़ा कर शत्रु संपत्ति को खुर्द बुर्द करने के लिए आफाक अहमद का नाम गलत तरीके से राजस्व रिकार्ड में अंकित किया गया था। रिकार्ड के पन्ने फटे हुए मिले थे। इसमें आजम खान, उनकी पत्नी पूर्व सांसद डॉ. तजीन फात्मा और उनके बेटे अब्दुल्ला समेत जौहर ट्रस्ट के अन्य सदस्यों को आरोपी बनाया गया है। इस मुकदमे में सेवानिवृत्त कलक्ट्रेट कर्मचारी भगवंत भी आरोपी हैं जो बाद में सरकारी गवाह बन गए थे। उनके बयान के आधार पर पुलिस ने मुकदमे में अग्रिम विवेचना की थी, जिसके बाद आजम खान पर मुकदमे में आइपीसी की तीन धाराएं 467, 471 और 201 बढ़ाते हुए चार्जशीट दाखिल की थी।
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