विधायक ने कहा, इतने गंभीर मरीजों के लिए बहुत सी मशीनों की जरूरत पड़ती है, जो जेल में उपलब्ध नहीं हैं। मैं भी जेल में 10 महीने रही हूं। जेल शाम 7:00 बजे बंद हो जाती है। उसके बाद सुबह 5:00 बजे खुलती है। जेल में अगर कोई अचानक बीमार हो जाता है या और कुछ हो जाता है तो सूचना जाने में या जेल खुलवाने में एक से दो घंटे लग जाते हैं।
उसके बाद डॉक्टर को उपलब्ध कराने में भी समय लगता है। इन परिस्थितियों में यदि आजम खां कि तबीयत खराब होती है या उनकी सेहत में गिरावट होती है या कुछ भी होता है तो, जिसने भी यह कराया है चाहे वह मेदांता अस्पताल हो या शासन-प्रशासन, इसके लिए वहीं जिम्मेदार होंगे।
तजीन फात्मा ने कहा कि आजम खां बेहद कमजोर हो गए हैं और उन्हें अब भी पोस्ट कोविड समस्या है। ऐसे में एक व्यक्ति को जबरदस्ती आदेश थमा देना कि आपको शिफ्ट किया जाता है, मेरे ख्याल से इससे ज्यादा जुल्म और कोई नहीं हो सकता। उनके फेफड़ों में संक्रमण हुआ था।
उनकी किडनी में संक्रमण था। यहां तक कि उनकी जुबान में भी अल्सर हो गया था और खाना खाने के लिए भी राइसट्यूब पड़ा था। यह सब अभी तक सामान्य नहीं हो पाया था। ऐसे में उन्हें मेदांता अस्पताल में सही उपचार मिल सकता था।
जेल में समुचित उपचार संभव नहीं है। विधायक ने कहा कि इस संबंध में उन्हें कोई सूचना न सीतापुर प्रशासन ने दी, न ही मेदांता अस्पताल प्रशासन या जेल प्रशासन ने।