आरोपियों के बयान के आधार पर पुलिस ने आजम खां को भी आरोपी बनाया था। उन पर डकैती डालने के साथ ही पूरे प्रकरण का षड्यंत्र रचने का भी आरोप लगाया था। पुलिस ने विवेचना के बाद चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की। कोर्ट में इस मामले की सुनवाई चल रही थी। बुधवार को इस मामले में अपना फैसला सुनाया।
एमपीएमएलए सेशन कोर्ट विजय कुमार ने दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद सपा नेता आजम खां, पूर्व पालिकाध्यक्ष अजहर खां,ठेकेदार बरकत अली, रिटायर्ड सीओ आले हसन, फिरोज खां, रानू खां, ओमेंद्र चौहान को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया। इससे पहले सपा नेता आजम खां को सीतापुर जेल से जबकि पूर्व पालिकाध्यक्ष अजहर अहमद खां को कड़ी सुरक्षा के बीच कोर्ट में पेश किया गया।
क्या है मामला
25 जुलाई 2019 को बस्ती निवासी रूबी ने गंज थाने में एक मुकदमा दर्ज कराया था। आरोप था कि तीन फरवरी 2016 को सपा शासनकाल में बस्ती खाली कराने के नाम पर आरोपी लोग उनके घर में घुस आए और उनके साथ मारपीट और गाली गलौज की। आरोप लगाया था कि सपा नेता आजम खां की शह पर आरोपियों ने उनसे 15 हजार रुपये लूट लिए थे। पुलिस ने मुकदमा दर्ज करने के बाद चार्जशीट दाखिल की और फिर कोर्ट में इस मामले की सुनवाई के बाद इस मुकदमे का फैसला सुनाया।
किसके पास से कितने नोट हुए थे बरामद
पुलिस की चार्जशीट के अनुसार रूबी के मकान से लूटे गए 15 हजार रुपयों में से फिरोज खां के डेढ़ हजार रुपये, रानू खां के कब्जे से छह हजार रुपये, ठेकेदार बरकत अली खां के कब्जे से आठ हजार रुपये बरामद हुए थे।
अभियोजन ने यह पेश किए गवाह
वादी रूबी, मेराजउद्दीन, एहतेशाम खां, शफीक बानो, रजिया, शकील अहमद, मोहम्मद असलम, शफायत उल्ला, एसआई श्रीकांत सत्यार्थी, राम किशोर गौतम, वीरपाल, कांस्टेबल परवेंद्र सिंह, इंस्पेक्टर अरविंद कुमार त्यागी, शरद पंवार, धर्मेंद्र सोलंकी।