फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

35 आदेशों के बाद भी सोया रहा प्रशासन

Mon, 08 Jan 2018 01:04 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ रामपुर
विज्ञापन
रामपुर में अशोक विहार कालोनी में तहसील और प्रशासन की टीम द्वारा नोटिस चप्सा करने गयी टीम से वार्ता करते लोग और मौजूद पुलिस।
विज्ञापन

विज्ञापन

40 साल के बाद प्रशासन को कुर्क जमीन पर कब्जा लेने की याद आ गई। 40 साल पहले वित्त मंत्रालय ने संपत्ति को कुर्क करने के आदेश दिए थे,लेकिन उस वक्त न तो सरकार ने आदेश जारी किया और न ही प्रशासन ने। लिहाजा इस लंबे समय में जहां जंगल था वहां अब घनी बस्ती हो गई। यहां के लोगों का गुस्सा यूं ही नहीं भड़का है। बस्ती उजाड़ने का नोटिस देखकर लोगों का पारा उस वक्त चढ़ गया जब प्रशासन ने लोगों को नोटिस थमा दिया। 

अशोक विहार और बजरिया हिम्मत खां मुहल्ले की तमाम जमीन को खाली कराने का यह मामला चालीस साल पुराना है। बकौल तहसीलदार हामिद हुसैन: शहर के मुहल्ला दोमहला रोड निवासी शौकत अली खां की आगापुर में जमीन थी। इसके साथ ही उसकी कुछ जमीन बजरिया हिम्मत खां में भी थी। इस जमीन को शौकत अली खां ने किसी कैलाश चंद्र को बेच दिया। कैलाश चंद्र ने इस जमीन पर प्लाटिंग कर दी। कागजों में यह जमीन शौकत अली खां के ही नाम पर थी। शौकत अली खां को वर्ष 1976 में एनडीपीएस एक्ट में पकड़ा गया था,जिसके बाद वित्त मंत्रालय ने इस जमीन को कुर्क करने के आदेश जारी किए गए थे, लेकिन उस वक्त इन आदेशों का पालन भी नहीं हुआ।
विज्ञापन
विज्ञापन


अब इस मामले में वित्त मंत्रालय ने फिर से एक आदेश जारी किया है साथ ही वित्त मंत्रालय ने इस मामले में अफसरों से भी जवाब तलब किया है। वित्त मंत्रालय की नाराजगी के बाद प्रशासन अब एक्टिव हुआ और इस मामले में बिना किसी सूचना के ही अशोक विहार कालोनी पहुंच गया, जहां नोटिस देखकर लोगों का गुस्सा भड़क गया। जिस जमीन को शौकत अली खां का बताया जा रहा है दरअसल यह जमीन तो सालों पहले ही शौकत अली खां ने कैलाश चंद्र को बेच दी थी। कैलाश चंद्र ने इस जमीन पर प्लाटिंग कर डाली,जिसके बाद यहां पर अशोक विहार बस गया। अशोक विहार कालोनी में 107 मकानों को प्रशासन अवैध बता रहा है,जबकि बजरिया हिम्मत खां में 17 लोगों को नोटिस थमाए हैं। इस कार्रवाई से लोगों में गुस्सा कायम है। 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें