यदि रामपुर में बाढ़ आई तो बचाव कार्य के लिए सेना का इस्तेमाल किया जा जाएगा। सेना की एक टीम रामपु में अब तक की गई बाढ़ की तैयारियों का जायजा लेने के लिए रामपुर पहुंचेगी। यह टीम गांव में जाकर मौका मुआयना करेगी। साथ ही अपने स्तर से तैयारियों को लेकर अफसरों के साथ मंथन करेगी।
मानसून ने उत्तर भारत में दस्तक दे दी है। मानसून की पहली बारिश हो चुकी है। उत्तराखंड में इन दिनों जोरदार बारिश हो रही है,जिसकी वजह से नदियों का जल स्तर भी अब धीमे-धीमे बढ़ना शुरू हो गया है। बाढ़ की आशंका को देखते हुए शासन ने इस दफा प्रत्येक बाढ़ प्रभावित जिलों में बचाव के काम की जिम्मेदारी सेना को सौंपने का फैसला लिया है।
इसके लिए आदेश भी जारी किए जा चुके हैं। सेना की एक टीम ने पिछले दिनों रामपुर पहुंचकर दौरा भी किया था। अब मानसून सक्रिय हो रहा है,जिसको देखते हुए सेना की एक टीम शुक्रवार को रामपुर पहुंचेगी,जहां यह टीम बाढ़ से संबंधित अफसरों के साथ मंथन करेगी।
साथ ही बाढ़ से प्रभावित होने वाले गांव का दौरा करेगी। इसके लिए पूरी टीम यहां मौका मुआयना करेगी। जिलाधिकारी महेंद्र बहादुर सिंह ने इस संबंध में सभी अफसरों को निर्देश जारी कर दिए हैं। साफ किया है कि अफसर सेना के अफसरों को सहयोग कर उनको मौैका मुआयना कराएं साथ ही उनके साथ बैठकर पूरी रणनीति तैयार करें,ताकि बाढ़ की स्थिति संभालने के लिए जरूरत पड़ने पर सेना का सहयोग लिया जा सके।
वहीं, रामपुर में वर्ष 2010 में जबर्दस्त बाढ़ आई थी। इस बाढ़ से जिले को भारी नुकसान हुआ था। रामपुर शाहबाद रोड पूरी तरह कट गया था। साथ ही कोसी नदी का कहर जिले के डेढ़ सौ गांव पर बरपा था। हजारों की आबादी इस बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हुई थी।