वन विभाग में पम्मी पर दर्ज हैं नौ केस
रेंजर ठाकुर विजय कुमार ने बताया कि परमजीत सिंह उर्फ पम्मी, निवासी चंदेला, कोतवाली बिलासपुर के ऊपर स्वार रेंज में अति संवेदनशील धाराओं के तहत वन अपराध के कुल नौ मामले दर्ज थे। उनका कहना है कि अपने ही साथियों के साथ खैर तस्करी में लिप्त था। उन्होंने बताया कि जानकारी मिली है कि खैर तस्करों के आपसी टकराव में उसकी गोली लगने से मौत हो गई। सोमवार को उसका शव जंगल से बरामद किया गया। शव की जांच में दाईं जांघ में गोली लगने का निशान पाया गया है।
कई बार भेजा जा चुका है जेल
चंदेला गांव निवासी परमजीत उर्फ पम्मा के बारे में थानाध्यक्ष निशा खटाना ने बताया कि उसके ऊपर खैर मिलकखानम और बिलासपुर कोतवाली में लकड़ी की तस्करी से जुड़े लगभग एक दर्जन मामले दर्ज हैं। कई बार उसे जेल भेजा जा चुका था।
पीपली वन में गुटबंदी में हो चुकीं कई हत्याएं
पीपली वन क्षेत्र में लकड़ी की अवैध कटान और तस्करी का संगठित अपराध तेजी से फैला हुआ है। सूत्रों के मुताबिक यहां लगभग एक दर्जन से अधिक तस्कर गिरोह सक्रिय हैं। इन गिरोहों के बीच वर्चस्व की लड़ाई इतनी हिंसक हो चुकी है कि कई बार आपसी गोलीबारी की घटनाएं हो चुकी हैं, जिनमें कई तस्करों की जान जा चुकी है।
जंगल और उसके आसपास के इलाकों में समय-समय पर शव मिलने से इलाके में दहशत का माहौल बना रहता है। गत वर्ष जनवरी में कुलवंत नगर थाना गदरपुर निवासी सुंदर लाल का शव बरामद हुआ था। मृतक दो दिनों से लापता था और उसके गले पर कटने का गहरा निशान पाया गया था, जिससे हत्या की आशंका और गहराई थी।
इस मामले में वन क्षेत्र में चल रहे आपराधिक नेटवर्क की ओर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे। वर्ष 2025 में फरवरी माह में केलाखेड़ा के रम्पुरा काजी निवासी सेठ उर्फ सेठा का शव भी बरामद हुआ था। बताया जाता है कि वह अपने साथियों के साथ जंगल से लकड़ी लेने गया था।
बाद में उसकी हत्या की खबर सामने आई, जिसे आपसी गुटबंदी और तस्करी के विवाद से जोड़कर देखा गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि तस्करों के बीच क्षेत्र और रास्तों को लेकर लगातार टकराव होता रहता है।
उत्तराखंड सीमा तस्करों की पनाहगाह
उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश की सीमाओं से सटा पीपली वन तस्करों के लिए सुरक्षित पनाहगाह बनता जा रहा है। उत्तराखंड के आर्य नगर और बिलासपुर क्षेत्र के अंबरपुर की सीमाएं इस वन क्षेत्र से जुड़ी होने के कारण तस्कर सीमाओं का फायदा उठाकर जंगल में घुसते हैं और अवैध रूप से लकड़ी का कटान कर उसे बाहर पहुंचा देते हैं।