बिलासपुर। तहसील क्षेत्र में 1988 से क्षतिग्रस्त होकर बंद पड़े लोअर सैंजनी बैराज के दोबारा चालू होने से किसानों की 38 साल पुरानी सिंचाई समस्या खत्म होने वाली है। बृहस्पतिवार को राज्यमंत्री बलदेव सिंह औलख ने बैराज एवं नहर प्रणाली के पुनर्स्थापना कार्य का स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों से निर्माण की प्रगति, गुणवत्ता और समय सीमा की विस्तृत जानकारी ली।
राज्यमंत्री ने कहा कि किसानों को पर्याप्त और सुचारु सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। लोअर सैंजनी बैराज क्षेत्र के किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण परियोजना है। 1988 में क्षतिग्रस्त होने के बाद से बंद पड़े होने के कारण क्षेत्र के किसान लंबे समय से सिंचाई संकट झेल रहे थे। 2017 में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद किसानों के हितों को देखते हुए इस उपेक्षित परियोजना को फिर से आगे बढ़ाया गया।
उन्होंने बताया कि पुनरीक्षित परियोजना की कुल लागत करीब 8,598.48 लाख रुपये आकलित है। परियोजना के तहत नहर प्रणाली की कुल निस्तारण क्षमता 35.20 क्यूसेक और कुल लंबाई 28.60 किलोमीटर है। दोनों ओर की नहरों के माध्यम से किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जाएगा।
बैराज चालू होने से तहसील के 26 गांवों के करीब 8,500 किसानों के खेतों तक नहरी पानी पहुंचेगा और 1,881 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा मिलेगी। नहर का पानी मिलने से पैदावार बढ़ेगी, डीजल पंप और महंगी सिंचाई पर खर्च घटेगा तथा खेती की लागत कम होगी। साथ ही क्षेत्र में हरियाली बढ़ेगी और भूजल स्तर में भी सुधार होगा।
राज्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता मानकों का पूरा पालन किया जाए और किसी भी तरह की लापरवाही न बरती जाए। शेष कार्यों को प्राथमिकता पर पूरा कर दो से तीन माह के भीतर नहरों में पानी पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
उन्होंने कहा कि निर्माण पूरा होने के बाद बैराज का नाम महान स्वतंत्रता सेनानी शहीद ऊधम सिंह के नाम पर रखने का प्रस्ताव सरकार को भेजा जाएगा। साथ ही सभी दलों के जनप्रतिनिधियों से अपील की कि वे बैराज का निरीक्षण करें और कोई कमी दिखने पर सकारात्मक सुझाव दें, ताकि सुधार कराया जा सके। इस मौके पर एसडीओ नहर नंद लाल आर्य, विवेक सक्सेना, जेई वीर सिंह आदि मौजूद रहे।