सूचना प्रसारण मंत्रालय के निर्देश पर इन करीब पांच हजार घंटे की रिकार्डिंग को डिजिटलाइज किया जा रहा है। करीब 80 फीसदी धुनें डिजिटलाइज करने के बाद आकाशवाणी की वेबसाइट पर अपलोड की जा चुकी हैं। बहुत जल्द मोबाइल एप्लीकेशन के जरिये इन्हें कोई भी श्रोता मनचाहे तरीके से ुन सकेगा।
आल इंडिया रेडियो के पास पूरे देश में करीब नौ लाख घंटों का रिकार्डिंग मैटेरियल मौजूद है। इसमें आकाशवाणी रामपुर के पास भी रिबन कैसेट में करीब ढाई हजार घंटों की रिकार्डिंग है। सूचना प्रसारण मंत्रालय इस रिकार्डिंग को पूरी तरह से डिजिटलाइज करा रहा है। रामपुर आकाशवाणी में यह रिकार्डिंग अस्सी फीसदी कंप्यूटर में फीड की जा चुकी है। ढाई हजार रिकार्डिंग सिस्टम बदले जाने के कारण पहसे से ही डिजिटलाइज्ड है। कुल मिलाकर पांच हजार डिजिटलाइज्ड रिकार्र्डिंग उपलब्ध है।
इसे पहले ही वेबसाइट पर अपलोड किया जा चुका है। सूचना प्रसारण मंत्रालय रिकार्डिंग के पूरी तरह डिजिटलाइजेशन के बाद मोबाइल एप्लीकेशन लांच करके श्रोताओं को एक बार फिर सुनने का मौका देगा। इससे पचास साल पुरानी रिकार्डिंग को एक बार फिर से सुनकर पुरानी यादें ताजा की जा सकेंगी। पूर्व में रिकार्ड हुई काव्य गोष्ठी, गजल संध्या हो या फिर बच्चों की प्रश्नोत्तरी, कृषि दर्शन, युगवाणी, साप्ताहिकी और विविधा के साथ ही कानूनी सलाहें फिर से सुन सकेंगे। जो फरमाइश दस साल पहले की गई उसे भी फिर से सुना जा सकेगा।
मोदी की डिजिटल इंडिया का हिस्सा
ये डिजिटल रूप प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डिजिटल इंडिया का हिस्सा है। आल इंडिया रेडियो के अलावा शायद दुनिया में किसी एक इकाई के पास इतना खजाना नहीं होगा जितना आकाशवाणी पर है। जो रूप-रंग पहले था बाद में जो माहौल है। आकाशवाणी के पास भारत की मूल आवाज, भारत का मूल चिंतन, भारत की मूल संस्कृति है। आने वाले दिनों में जो पीएचडी करना चाहते होंगे उनके लिए भी अवसर देने की योजना है।