रामपुर। जिले में मनरेगा के कार्यों की सीबीआई जांच हो सकती है। प्रशासन ने ब्लाकवार दो साल का ब्योरा शासन को भेज दिया है। सीबीआई जांच को लेकर अधिकारियों और कर्मचारियों में खलबली मच गई है। जिलास्तरीय जांच में कई घपले पहले ही पकड़े जा चुके हैं।
कांग्रेस की केंद्र सरकार को मनरेगा में बड़े पैमाने पर घपले की शिकायतें मिली थीं। लिहाजा शासन ने कई जिलों की सीबीआई जांच बैठा दी थी। सीबीआई जांच में प्रदेश के सात जिलों का घपला पकड़ में आ चुका है। यह मामला हाईकोर्ट में भी पहुंच गया है। अदालत ने सीबीआई को सभी जिलों की टेस्ट जांच की इजाजत दे दी है। अदालत के फैसले के बाद सीबीआई अब सभी जिलों में टेस्ट जांच कर सकती है। इसके लिए 2008-09 और 2009-10 में मिले धन का ब्योरा तलब किया गया था। सभी जिलों से शासन को दो साल का ब्योरा भेजा जा रहा है। जिले से भी दो साल का ब्योरा शासन को भेज दिया गया है। परियोजना निदेशक भानुप्रताप सिंह ने जो ब्योरा भेजा है उसके मुताबिक दो साल में सभी ब्लाकों को मनरेगा से करीब 51 करोड़ रुपये मिले थे। सीबीआई जांच को लेकर अधिकारियों और कर्मचारियों में खलबली मच गई है। चूूूंकि जिला स्तर पर कराई गई जांच में तमाम घपले पकड़े जा चुके हैं।