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रामपुर के पहले सांसद थे मौलाना आजाद

Tue, 12 Nov 2013 05:44 AM IST
Rampur
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रामपुर। देश के पहले शिक्षा मंत्री व रामपुर के पहले सांसद मौलान अबुल कलाम आजाद की 11 नवंबर को 125 वीं जयंती थी। रामपुर के कांग्रेसियों को मौलाना आजाद की याद नहीं आई। रामपुर के उन लोगों ने भी मौलाना आजाद को याद नहीं किया जो अपनी तकरीर में उस महान व्यक्तित्व का बार-बार उल्लेख करते हैं। सिर्फ-सिर्फ चमरौव्वा ब्लाक में शिक्षा विभाग की ओर से जागरूकता रैली निकाली गई।
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11 नवंबर को मौलाना आजाद की 125 वीं जयंती थी। मौलाना आजाद का रामपुर से पुराना संबंध रहा है। रामपुर को यह गौरव प्राप्त है कि मौलाना आजाद यहां के पहले सांसद थे। मौलाना आजाद हिन्दू मुसलिम एकता प्रबल समर्थक, देश के विभाजन के विरोधी, ओजस्वी वक्ता व कुशल प्रशासक थे। वो एक महान शिक्षाविद् थे। मौलाना आजाद ने इंडियन इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलाजी (आईआईटी), यूनिवर्सिटी ग्रांट कमिशन (यूजीसी), इंडियन काउंसिल फार कल्चरल रिलेशंस (आईसीसीआर), साहित्य अकादमी, ललित कला अकादमी, संगीत नाटक अकादमी और कौंसिल आफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च (सीएसआईआर) की स्थापना कराई।
जब मौलाना के नाम की जरूरत पड़ती है तो उसका उपयोग करने से कोई पीछे नहीं हटता है। चाहे वो कांग्रेसी हो या किसी अन्य दल के नेता। भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीद्वार नरेंद्र मोदी कांग्रेस को मौलाना आजाद की 125 वीं जयंती की याद दिला रहे हैं। रामपुर में तो भाजपाइयों ने भी मौलाना को याद नहीं किया। वैसे भी मौलाना आजाद जैसे व्यक्तित्व को किसी पार्टी से जोड़कर देखना उनका अपमान करने के बराबर है। वो पूरे हिन्दुस्तान या दूसरे शब्दों में कहे कि अविभाजित हिन्दुस्तान के एक महान नेता थे, जो सपने भी नहीं चाहते थे कि देश का विभाजन हो।
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