रामपुर। श्री शिवमहापुराण कथा में कथा व्यास ने शिव पूजा का महत्व, गुरु का स्थान और सत्संग व भक्ति के प्रभाव के बारे में बताया। साथ ही पूजा, जप, तप और ध्यान की विस्तृत व्याख्या की।
कृष्णा विहार में चल रही श्री शिवमहापुराण कथा में कथा व्यास पवन कौशिक जी महाराज ने कहा कि ब्रह्मा, विष्णु और महेश यानि शिवजी के प्रकट होने के बाद परमपिता निराकार परम ज्योति स्वरूप सदाशिव के आदेशानुसार ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की। जिसमें सबसे पहले मानसिक सृष्टि में आनंद वन यानि काशी की रचना की। इसके बाद सभी लोक, मानव, पेड़-पौधे, नदी, पहाड़ आदि की रचना की। इसके साथ ही कथा व्यास ने गुरु का महत्व बताते हुए कहा कि गुरु के बिना ज्ञान संभव नहीं है और बिना ज्ञान के मनुष्य अंधकार में रहता है और उसका मानव जीवन निरर्थक है। यानि जीवन को आधार और सार्थकता प्रदान करने वाले गुरु का स्थान सर्वोपरि है। इसके साथ ही उन्होंने शिव पूजन विधि और चारों युग के बारे में बताया। किस युग का कैसा प्रभाव और क्या विशेषता है, इसके बारे में विस्तार से बताया। कथा विश्राम पर श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया। इस अवसर पर पूर्व मंत्री शिवबहादुर सक्सेना, मीडिया प्रभारी सुभाष सक्सेना, रामदत्त शर्मा, राममुरारी लाल शर्मा, वीके जौहरी, विकास सक्सेना, सर्वेश बहादुर सक्सेना, कल्याण सैनी, नरेश चंद्र, सत्येंद्र बहादुर सक्सेना, दुर्गेश सक्सेना, मोहन शर्मा आदि मौजूद रहे।