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Rampur News: बीआरसी में कैद 7.80 लाख किताबें, आधे से अधिक स्कूलों तक नहीं पहुंचीं

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रामपुर। सत्र शुरू होने से पहले ही शासन ने मुफ्त किताबों की खेप विभाग को भेज दी, लेकिन पहले आचार संहिता के फेर में फंसकर हजारों बच्चों तक किताबें नहीं पहुंच पाई हैं। जिले के सभी बीआरसी केंद्रों में करीब 7.80 लाख से ज्यादा किताबें दफ्तरों में कैद हैं। लिहाजा स्कूलों में पुरानी किताबों से ही पढ़ाई हो रही है। काफी बच्चों के पास तो पुरानी किताबें भी नही हैं। सर्व शिक्षा अभियान के तहत परिषदीय स्कूलों में कक्षा-1 से 8 तक के बच्चों को मुफ्त में पाठ्य पुस्तकें उपलब्ध कराई जाती हैं। यह किताबें बेसिक शिक्षा विभाग सीधे स्कूलों तक पहुंचाता है और स्कूलों में इनका वितरण कराता है। हर साल तो किताबों की छपाई से लेकर अन्य दिक्कतों के चलते मुफ्त किताबें सत्र शुरू होने के कई माह बाद तक पहुंचती थी, लेकिन इस दफा शासन ने आचार संहिता लागू होने से पहले ही किताबों की खेप विभाग के पास पहुंचा दी।
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किताबें तो आ गईं, लेकिन इनका वितरण का कार्य अभी तक पूरा नहीं हो पाया है। रामपुर किताबें पहुंचने के बाद इनका वितरण पहले आचार संहिता में फंस गया है। विभाग ने इस बाधा को दूर करने के लिए आयोग से परमीशन ली और फिर किताबों को बीआरसी तक पहुंचा दिया, लेकिन बीआरसी से स्कूलों तक यह किताबें नहीं पहुंच पा रही हैं।
इसके वितरण को लेकर बीआरसी के अफसरों व कर्मियों की लापरवाही सामने आ रही है। जिले में करीब 13 लाख किताबों का वितरण होना है, लेकिन अभी तक सिर्फ चालीस फीसदी किताबों का ही वितरण हो सका है। विभागीय अफसर कह रहे हैं कि इस माह के अंत तक शत-प्रतिशत किताबें बच्चों तक पहुंच जाएंगी। फिलहाल किताबें न पहुंचने से बच्चे स्कूलों में पुरानी किताबों से ही पढ़ाई कर रहे हैं।
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किताब वितरण पर नजर
जिले में कुल परिषदीय स्कूल-1599
पंजीकृत बच्चों की संख्या-1.75 लाख
कुल किताबें मिली13 लाख
अब तक वितरित-5.20 लाख
बीआरसी में बंद-7.80 लाख




सभी 13 लाख किताबें बीआरसी तक पहुंचा दी गई हैं, जहां से इनका वितरण स्कूलों तक कराया जा रहा है। स्कूलों में अब तक चालीस फीसदी किताबों का वितरण किया जा चुका है। शेष किताबें इस माह के अंत तक बांट दी जाएंगी। - संजीव कुमार, बीएसए
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