जुब्बल (रोहड़ू)।
सेब के बगीचों को पानी से तर करने के लिए प्रदेश में पहली बार एआईबीपी के तहत सिंचाई योजनाओं का शिलान्यास वर्ष 2008 से वर्ष 2010 के बीच किया गया था। करीब 52 करोड़ रुपये की लागत से जुब्बल-कोटखाई क्षेत्र में विभिन्न स्थानों पर 11 सिंचाई योजनाओं का निर्माण कार्य शुरू किया था, जो आठ साल में पूरी नहीं हुआ। योजनाओं के लिए लाखों रुपये के टैंक बनाए, जो बेकार पड़े हैं। इस बार चुनाव में सिंचाई योजना का यह मुद्दा गरमाएगा।
सिंचाई योजनाओं का शिलान्यास तत्कालीन बागवानी मंत्री नरेंद्र बरागटा ने किया था। योजना का निर्माण एआईबीपी (एक्सीलेटिड इरिगेशन बेनिफिट प्रोग्राम) के तहत किया जाना था। योजना के तहत विभिन्न स्थानों पर एक लाख से तीन लाख लीटर तक के 100 से अधिक टैंकों का निर्माण किया जाना था। सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग ने अधिकांश स्थानों पर टैंकों का निर्माण किया तथा पानी की पाइपें बिछाई। लेकिन सिंचाई योजनाओं का लाभ बागवानों को नहीं मिल पाया है। बागीचों के लिए लाई गई प्रदेश की पहली सिंचाई योजना अधर में लटकी हुई है।
12 हजार को मिलना था लाभ
सेब की उन्नत किस्मों को पैदा करने के लिए बागीचों को ड्रिप इरिगेशन (टपक सिंचाई) से जोड़ना आवश्यक है। उद्यान विभाग के बागवानों को ड्रिप इरिगेशन से जुड़ने के लिए प्रेरित भी कर रहा है। लेकिन पानी के अभाव में बागवान चाह कर भी ड्रिप इरिगेशन स्कीम से नहीं जुड़ पा रहे। मौजूदा आंकड़ों के मुताबिक जुब्बल-कोटखाई में करीब 12000 बागवान उद्यान विभाग के पास पंजीकृत है। इनमें से मात्र 55 बागवान स्कीम से जुड़ सके हैं।
एक करोड़ से अधिक सेब पेटियों का उत्पादन
जुब्बल-कोटखाई क्षेत्र में 80 प्रतिशत आबादी बागवानी पर ही निर्भर है। औसतन यहां एक करोड़ से अधिक सेब की पेटियों का उत्पादन हर वर्ष होता है। सिंचाई योजनाओं से जुब्बल-कोटखाई की 48 पंचायतों के बागवान लाभान्वित होने थे।
बजट के अभाव में लटकी है सिंचाई योजना
सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग के अधिशासी अभियंता मंदीप गुप्ता ने माना कि सिंचाई योजनाएं अभी कार्य नहीं कर रही हैं। योजना का निर्माण पूरा करने के लिए करीब पांच करोड़ रुपये के बजट की आवश्यकता है। जैसे ही बजट आएगा तो योजना का निर्माण शीघ्र पूरा किया जाएगा। उद्यान विकास अधिकारी जुब्बल सुनील दत्त शर्मा ने बताया कि बागवानी के लिए सिंचाई योजना काफी आवश्यक है। पानी के बिना बागीचों में स्प्रे करना तथा ड्रिप इरिगेशन लगाना असंभव है।
अनदेखी से नहीं मिला लाभ : बरागटा
जुब्बल-कोटखाई में 52 करोड़ रुपये की लागत से सिंचाई योजनाओं का निर्माण शुरू करवाया था। बागवानों के लिए आज तक की यह सबसे बढ़ी योजना थी। लेकिन कांग्रेस सरकार की अनदेखी के कारण सिंचाई योजनाओं का लाभ बागवानों को नहीं मिल सका है। जिन टैंकों का निर्माण किया गया था, वह भी आज बदतर स्थिति में पहुंच गए हैं। भाजपा सरकार बनने के बाद सिंचाई योजनाओं का कार्य पूरा करवाया जाएगा।
बागवानों से बातचीत
योजनाएं अधर में
कोटखाई की कोलवी गांव के बागवान अशोक राजटा ने बताया कि सिंचाई योजनाएं लंबे समय से अधर में हैं। योजना का निर्माण करने में सरकार पूरी तरह से नाकाम साबित हुई है।
नहीं मिला लाभ
गुम्मा के बागवान जीत राम ने बताया कि योजना के तहत टैंकों का निर्माण तो पिछली सरकार के कार्यकाल में कर दिया गया था। लेकिन योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा है।
बागवानों के लिए जरूरत
थाना गांव के बागवान कुलदीप चतरांटा ने बताया कि सिंचाई योजनाएं बागवानों की जरूरत है। लेकिन योजना का कार्य अधर में लटका हुआ है, जो काफी दुर्भाग्यपूर्ण है।