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बिजली चोरी में दर्ज हुईं 5800 रिपोर्ट, किसी में नहीं लग सकी चार्जशीट

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रामपुर। जिले में बिजली चोरी रोकने एवं बिजली संबंधित मामलों की रिपोर्ट दर्ज कर जांच करने के लिए सरकार की ओर से अलग बिजली थाने गठित किए गए थे। अक्तूबर 2019 में रामपुर में भी बिजली थाना बना था, जहां तब से अब तक करीब 5800 एफआईआर हो चुकी हैं। हैरानी इस बात की है कि पुलिस अब तक एक भी मामले में चार्जशीट दाखिल नहीं कर सकी है। हालांकि, पुलिस ने 585 मामलों में फाइनल रिपोर्ट (एफआर) जरूर लगा दी है।
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बिजली चोरी रोकने के लिए विभाग की ओर से चेकिंग की जाती है। इस दौरान जहां भी बिजली चोरी मिलती है, तो उनके खिलाफ रिपोर्ट भी दर्ज कराई जाती है। पहले बिजली चोरी की रिपोर्ट संबंधित थानों में दर्ज होती थीं, लेकिन सरकार ने सिविल पुलिस से विवेचनाओं का बोझ कम करने के लिए प्रदेश के सभी जिलों में अलग से एंटी पावर थेफ्ट पुलिस थाने स्थापित किए। रामपुर की बात की जाए तो जिले में एंटी पॉवर थेफ्ट थाना अक्तूबर 2019 में खोला गया था, जहां तभी से बिजली चोरी से संबंधित मामलों की रिपोर्ट दर्ज की जा रही है। तब से अब तक थाने में करीब 5800 रिपोर्ट दर्ज हो चुकी हैं, लेकिन अब तक एक भी मामले में पुलिस अदालत में चार्जशीट दाखिल नहीं कर सकी है। हजारों मामलों की विवेचना ठंडे बस्ते में पड़ी हुई है। इस वजह से करोड़ों का राजस्व भी फंसा हुआ है।
केस-1
- दिसंबर 2019 में पहाड़ी गेट बिजलीघर क्षेत्र में सगीर अहमद के यहां बिजली चोरी मिली थी, जहां सात किलोवाट बिजली चोरी हो रही थी। इस पर विभाग की ओर से बिजली थाने में रिपोर्ट दर्ज करा दी गई, लेकिन इसके बाद न तो उपभोक्ता ने शमन शुल्क का भुगतान किया और न ही जुर्माने का। ऐसे में यह मामला तभी से अधर में लटका हुआ है।
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केस-2
- जनवरी 2020 में नवाब गेट बिजलीघर क्षेत्र में शेरा के यहां बिजली चोरी मिली थी। यहां 5.50 किलोवाट बिजली का चोरी से उपभोग होता मिला था, जिसके बाद अवर अभियंता ने रिपोर्ट दर्ज करा दी थी, लेकिन यहां भी उपभोक्ता ने जुर्माना और शमन शुल्क का भुगतान नहीं किया। इस बाबत न तो विभाग की ओर से और न ही पुलिस की ओर से कोई ठोस कदम उठाए गए।
केस-3
- जून 2020 मेें गंज बिजलीघर क्षेत्र में फरमान कुरैशी के यहां बड़े पैमाने पर बिजली चोरी मिली थी। नौ किलोवाट की बिजली चोरी मिलने के बाद विभाग की तरफ से रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी, लेकिन यह मामला भी जस का तस पड़ा है। ऐसा एक नहीं, बल्कि हजारों मामले हैं, जिसमें न तो पुलिस दिलचस्पी ले रही है और न ही विभाग।
मुकदमा दर्ज होने के तीन माह बाद दाखिल करनी होती है चार्जशीट
रामपुर। जिले में बिजली थाने का गठन होने के बाद शासन ने रामपुर में एक एसओ, तीन हेड कांस्टेबल एवं दो सिपाहियों की तैनाती की थी। इसके अलावा विभाग की ओर से एक संविदा का कंप्यूटर ऑपरेटर दिया गया था। लेकिन, इतना स्टाफ होने के बाद भी पुलिस अब तक एक भी मामले में अदालत में चार्जशीट दाखिल नहीं कर सकी है। जबकि, पुलिस को तीन माह के बाद ही अदालत में चार्जशीट दाखिल करनी होती है। ऐसे में पुलिस की इसी लापरवाही एवं सुस्ती की वजह से बिजली चोरी के बड़े मामले में लंबित पड़े हैं, जिसमें विभाग का बड़े पैमाने पर राजस्व फंसा हुआ है।
585 मामलों में लगाई जा चुकी है एफआर
रामपुर। बिजली थानेे में दर्ज बिजली चोरी के मामले में भले ही छह हजार के करीब हों, लेकिन पुलिस 585 मामलों में एफआर (फाइनल रिपोर्ट) लगा चुकी है। इनसे विभाग को करीब एक करोड़ रुपये राजस्व प्राप्त हुआ है, जबकि करीब 15 लाख रुपये शमन शुल्क के जमा हुए हैं।
चार्जशीट दाखिल न करने के पीछे का कारण विभाग का हित ही है। यदि इन मामलों में चार्जशीट दाखिल हो गई, तो विभाग का राजस्व लगभग मारा जाना तय है। ऐसे में हमारा प्रयास रहता है कि उपभोक्ता के पास बार बार जाकर उससे राजस्व जमा कराया जाए। यदि उपभोक्ता राजस्व जमा कर देता है तो फाइनल रिपोर्ट लगा दी जाती है।
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-रजनीश कुमार, एसओ, थाना एंटी पॉवर थेफ्ट, रामपुर
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